वहम · basketball · Uncategorized

गुरुत्‍व प्रेम और उठना पैरों का

बीस साल की उम्र में बॉस्‍केटबॉल खेलना शुरू किया था। कुछ लोगों का विचार था, कि तब तक मेरी खेल शुरू करने की उम्र बीत चुकी है, लेकिन अगला एक साल मैंने खेल सीखा और तीन साल तक कोर्ट पर जमकर जलवे दिखाए। इससे एक वहम पक्‍का हो गया कि मैं जब भी खेलना शुरू… पढ़ना जारी रखें गुरुत्‍व प्रेम और उठना पैरों का

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पगे लागूं महाराज

बचपन में मैं महाराजों को बहुत देखता था। इन सालों में महाराजों की संख्‍या कुछ कम हो गई है। कुछ परिभाषा में भी आंशिक बदलाव आ गया तो महाराज की इतनी गरिमा भी नहीं रही। जब उन महाराजों को देखता था तो सोचता था कि एक दिन मैं भी महाराज बनूंगा। मैंने किसी समझदार से… पढ़ना जारी रखें पगे लागूं महाराज

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शक्ति के नियम और पतंगबाजी…

हर बार मकर संक्रांति पर जयपुर वाले जमकर पतंगें उड़ातें हैं और बीकानेर वाले आखातीज को याद करते हैं। आपको क्‍या लगता है, इस बार कुछ नया हुआ होगा, नहीं बिल्‍कुल नहीं। इस बार भी वही हुआ। लेकिन मैंने कुछ अलग करने की ठानी है। पतंगबाजी के बीच से कुछ छानकर निकालने को छननी तानी… पढ़ना जारी रखें शक्ति के नियम और पतंगबाजी…