ईश्‍वर · sidharth joshi

सुख और दुख

सुख और दुख को उसने कुछ इस तरह डिफाइन किया कि हर बार खुद उलझता चला गया। अब मेरे लिए मजे का खेल बनता जा रहा था।

बात शुरू होने से पहले मैं जानता था कि वह मुझसे सवाल पूछ रहा है। लेकिन हकीकत में जवाब खुद ही जानता है।

जितना अधिक बोल रहा था। उसके लिए छिपाने या बचने के रास्‍ते खत्‍म होते जा रहे थे। उसकी खीज का यही एकमात्र कारण नहीं था।

दूसरा बड़ा कारण यह भी था कि किसी इंटेलिजेंट से इंटेलिजेंट और शातिर से शातिर दिमाग वाले से भी नहीं सुलझ सकने वाली उसकी समस्‍याओं को मैं मुस्‍कुराते हुए सुन रहा था।

हद यह हुई कि वह उठकर जाने के बारे में सोचने लगा। मैंने पुचकारने के अंदाज में उसे फिर बरगलाया, मानो उडीक ही कर रहा था। वापस बैठ गया। अब मैंने गंभीर होने का ढोंग किया।

वह क्‍लीयर था कि मैं ढोंग कर रहा हूं, लेकिन वह पचा गया। मेरी ओढ़ी हुई गंभीरता उसके मुफीद थी। यों ही कोई परेशान थोड़े होता है।

ईश्‍वर हंसा होगा जब मैंने उसे कहा “भाग्‍य का ठेका मेरे पास है” और वह मान भी गया।

ईश्‍वर जरूर हंसा होगा, उस नादान पर।

इच्‍छा · ईश्‍वर · छद्म · निर्णय · विकल्‍प · स्‍वातंत्र्य

विकल्‍प और छद्म विकल्‍प!!

बहुत बार लोगों को यह कहते हुए सुनता हूं कि मैंने फलां निर्णय लिया तो आज इस स्थिति में हूं। या फलां निर्णय लेता तो आज उस स्थिति में होता। दूसरी ओर यह भी कि ईश्‍वर को यही मंजूर था। हकीकत क्‍या है, निर्णय मैं लेता हूं या ईश्‍वर लेता है। यह एक पुराना और… पढ़ना जारी रखें विकल्‍प और छद्म विकल्‍प!!

ईश्‍वर · ज्‍योतिष · धर्म · वेद · स्‍वतंत्रता · new thought · sidharth joshi

स्‍वतंत्रता की संभावना – भाग तीन

ईश्‍वरवादी धर्मों में स्‍वतंत्रता की संभावनाईश्‍वरवादी धर्म वे हैं जो वेदों को मानते हैं। यह दर्शन विषय की भाषा है। ईश्‍वर की व्‍यु‍त्‍पत्ति कुछ इस तरह होती है कि वह सबकुछ जानने वाला है और सभी कुछ नियंत्रित रखता है। यानि सृष्टि में जो कुछ हो रहा है वह पूर्व नियत है। इंसान केवल खिलौना… पढ़ना जारी रखें स्‍वतंत्रता की संभावना – भाग तीन