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प्रेमचंद आज

प्रेमचंद आज यदि कम्‍युनिज्‍म की आड़ लेकर ईदगाह लिखी होती तो वे लिखते…

1. देश का अधिकांश गरीब भूखा मर रहा है, उसके पास ट्रेड फेयर में खरीदने के लिए पैसा तक नहीं है। एक तरफ परधानजी नित नए कपड़े पहन रहे हैं और हामिद फटे कपड़े पहने घूम रहा है।

2. परधानजी एफडीआई की बात करते हैं, लेकिन देश का गरीब और गरीब होता जा रहा है और अमीर और अधिक अमीर, हामिद मुसलमान है, इसलिए उसके भाग्‍य में गरीब होना बदा गया है।

3. हामिद के पास ढंग का मोबाइल तक नहीं है, क्‍योंकि वह मुसलमान है।

4. दीपावली पर करोड़ो रुपए के पटाखे छोड़कर जहां अमीरी नग्‍न नृत्‍य कर रही है, वहीं हामिद की दादी अल्‍पसंख्‍यक होने के कारण चूल्‍हा तक नहीं जला पा रही। मोदीजी कहां है आपके सब्सिडी छोड़ने वाले??

5. बहुसंख्‍यक सवर्णों ने हमेशा दलितों पर अत्‍याचार किए हैं, हजारों साल से करते रहे हैं, छुआछूत करते हैं, इस कारण हामिद को चिमटा खरीदना पड़ रहा है, वरना पास के हिंदू टोले से अल्‍पसंख्‍यक हामिद की दादी चिमटा मांगकर भी काम चला सकती थी। इससे समुदाय भावना का विकास ही होता, लेकिन अलगाववाद के बीज ने भारत को नष्‍ट कर दिया है। दलितों का शोषण बंद करो मोदीजी…

6. हामिद का चिमटा कोई साधारण चिमटा नहीं है, यह दक्षिणपंथियों और राष्‍ट्रवादियों के मुंह पर तमाचा है।

7. चिमटा ही ऐसी चीज है जो हिंदू मुस्लिम एकता का प्रतीक है, चाहे हामिद खरीदे या जॉन सभी की दादी चिमटे से अपने जलते हुए हाथ बचाना चाहती है, लेकिन मोदी सरकार पैलेट गन लेकर पीछे पड़ी है।

8. हामिद को चिमटे के बजाय चाकू खरीदना चाहिए था, क्‍योंकि साथी इतना समझ लो संघर्ष ही जीवन है और क्रांति से ही परिवर्तन होगा।

9. पूस की रात में दलित ठिठुरते हैं और अल्‍पसंख्‍यकों को अपना चिमटा मेले की मौज मस्‍ती के पैसों से खरीदना पड़ता है। इस देश की न्‍याय व्‍यवस्‍था कहां है, हमें सामाजिक न्‍याय की जरूरत है, हर जरूरतमंद को चिमटा और रजाई सरकार मुफ्त में दे, हम ऐसी ही सरकार को वोट देंगे।

10. दलितों पर अत्‍याचार पर ही देश की नींव पड़ी है, अब इस सिस्‍टम को बदलने की जरूरत है, हामिद का चिमटा इस भ्रष्‍ट तंत्र की ईंट से ईंट बजा देगा।

11. अंग्रेजों ने पढ़ना लिखना सिखाया, मुगलों ने वाद्य यंत्र और शासन प्रणाली दी, लेकिन ब्राह्मणों ने हमेशा हमें लूटा और पीडि़त रखा, इस देश का कल्‍याण तभी हो सकता है, जब ब्राह्मणों का सफाया हो जाए और देश में जाति व्‍यवस्‍था समाप्‍त हो जाए।

12. देश को मंगलयान की नहीं रोटी की जरूरत है, सभी संसाधनों को देश की थोथी प्रगति के बजाय जुल्‍म से पीडि़त लोगों को रोटी देने में झोंकने की जरूरत है। न बांध, न पुल, न सड़कें हमें रोटी दे सकती है, रोटी हमें परचून की दुकान वाला बणिया देता है, लेकिन वह पूंजीवादी है, इसलिए उस पूंजीवादी की दुकान लूट लो और देश में समरसता कायम करो…

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