sidharth joshi

तुमने उसे समस्‍या बनाया

वो कभी समस्‍या नहीं थी, तुमने उसे समस्‍या बनाया

गाय को पहले तो आर्थिक पशु घोषित किया गया, उसके दूध से दूधो नहाओ पूतो फलो करते रहे, लेकिन जब उसी गाय ने दूध देना बंद कर दिया तो उसे समस्‍या का हिस्‍सा घोषित कर दिया। वास्‍तव में गाय पहले कभी समस्‍या का हिस्‍सा नहीं थी। जब मां थी, तब भी टलती थी, आज भी टलती है, यानी दूध देना बंद करती है।

पहले उन लोगों को पता था कि गाय के लिए गोचर भूमि की जरूरत होगी, सो जितना शहर बसा होता, कई बार उससे भी अधिक क्षेत्र गोचर भूमि के लिए छोड़ दिया जाता, लेकिन शहरी बसावट बढ़ते बढ़ते आखिर गोचर का अतिक्रमण करती और पशुओं के लिए दूर दराज से चारा खरीदा जाने लगा। अब डीजल पर चढ़कर चारा आएगा तो गोचर की तुलना में हर कोण से महंगा ही होगा।

यह महंगा चारा, दूधारू पशु को खिलाने के लिए तो ठीक है, लेकिन टली हुई गाय को कैसे खिलाया जाए, सो पहले उसे भूखा मारते हैं, फिर गलियों में छोड़ देते हैं। ये कुछ कुछ उन नालायक संतानों की तरह है जो अपने मां बाप को भी बुढ़ापे में सड़ने के लिए छोड़ देते हैं।

राजस्‍थान में गंग नहर बनी तो उसके किनारे चारागाह विकसित होने लगे, बाद में इंदिरा गांधी नहर में उसे तब्‍दील कर दिया गया, नहर के किनारे सैकड़ो किलोमीटर तक नहर को ढहने से बचाने के लिए युक्लिप्टिस के पेड़ लगा दिए गए, लेकिन नहर के सीपेज से चारागाह विकसित नहीं किए गए, अगर नहर के किनारे चारागाह के लिए कुछ जमीन छोड़ते हुए चलते तो जितना पशु आज डेनमार्क में है, उससे अधिक पशु अकेले राजस्‍थान में हो सकता था, लेकिन जमीन के लालची लोगों और सरकार ने एक कतरा जमीन भी चारागाह के लिए नहीं छोड़ी।

बीकानेर में दो गोचर भूमि है, एक 27 हजार बीघा और एक 12 हजार बीघा। किसी जमाने में यह जमीन बियाबान का हिस्‍सा हुआ करती थी, आज यह शहर से सट गई है। जमीन के लालची लोगों ने सैकड़ों प्रयास किए कि किसी प्रकार यह जमीन वे हड़प कर लें और गोचर में घर बना लें, लेकिन कुछ लोगों की सजगता के कारण आज तक उनका सपना पूरा नहीं हो पाया है, लेकिन हर शहर इतना भाग्‍यशाली नहीं होता, राजस्‍थान की राजधानी जयपुर में हजारों एकड़ भूमि गोचर भूमि थी, शहर बढ़ता गया, बिल्‍डर बढ़ते गए और गोचर खत्‍म होते गए, आज वहां यह स्थिति है कि कहीं कही कोई गोचर का पैच है तो वहां माना जाता है आज नहीं तो कल जयपुर डवलपमेंट ऑथिरिटी वहां प्‍लॉट काट देगी।

जब अपनी मां के लिए जमीन ही नहीं छोड़ोगे तो उसे टलने के बाद कहीं तो जाना ही होगा, गलियों में निष्‍कासित करोगे तो गलियों में सड़ेगी और गोचर में हरी हरी चरने के लिए छोड़ोगे तो वहां हरी हरी चरेगी।

अगर टल गई है तो उसे मारकर चमड़ा ही निकाल लोगे, तो परिवार में और लोग भी है, उपभोगतावाद के चरम में उनका भी नम्‍बर लगेगा…

Advertisements