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नास्तिक ढोंगी

एक बंदा आस्तिक से नास्तिक हो गया, उसने नास्तिक बनने के फायदे गिनाए हैं। मैंने भी नास्तिक होने के फायदे दूसरे कोण से देखे हैं… 😉
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1 किसी भूत प्रेत पीपल बरगद से डर नहीं लगता,

नास्तिक डरपोक इन पेड़ पौधों के बजाय अपनी ही परछाई से डरने लगते हैं, जो डर से मुक्‍त हैं वे किसी पेड़ पौधे या जानवर से कभी नहीं डरते, यह समस्‍या व्‍यक्तिगत इंसानी कमजोरी की है, जो जबरन धर्म पे उंडेली गई है।

2-सांप बिच्छू तक से डर ख़त्म हो गया है प्यार बढ़ जाता है।

सच्‍चा आस्तिक तो कण कण में भगवान देखता है, आप ढोंगी थे और अब नहीं रहे, यह खुशी की बात है।

3- पूजा पाठ- कथा प्रवचन में चवन्नी खर्च नहीं होती।

बस अब कभी साइकोलॉजिस्‍ट के यहां चक्‍कर निकालते हैं और कभी साइक्रेटिस्‍ट के यहां। बाकी बचा समय पूजा पाठ करने वालों को कोसने में बीत जाता है। जैसा कि सुधिजन कहते हैं “ज्ञानी बिताए ज्ञान से मूरख बिताए रोए”

4- गाय और कुत्ते पर एक समान प्यार आता है।

आस्तिक के लिए दोनों बराबर हैं। मेरा ऑब्‍जर्वेशन है कि आस्तिक की श्रद्धा गाय के प्रति अधिक है तो नास्तिक की कुत्‍ते के प्रति। आस्तिक गोबर उठाकर लाता है, उपले बनाकर काम में लेता है और नास्तिक कुत्‍ते का गू उठाकर उससे पिंड छुड़ाने के रास्‍ते सोचता रहता है।

5- अपने किये अच्छे काम का क्रेडिट खुद को मिलती है और गलती होने पर हरि इच्छा न मान कर उसे आगे दोहराने से परहेज करने लगता है।

साइकोलॉजिकली कोई इंसान अपनी सभी गलतियों का बोरा अपने सिर पर ढो नहीं सकता। ऐसे में मैं नास्तिकों को देखता हूं कि वे बजाय कि ईश्‍वर (तीसरी सत्‍ता) पर गलतियों का बोझ छोड़ देने के, अपने आस पास के लोगों को पर ही दोषरोपण करने लगते हैं। युवा नास्तिकों में तो अपने माता पिता को लेकर बहुत ही अधिक राग विराग होता है। कुछ अपने परिजनों और दोस्‍तों तक को गालियां निकालते नजर आते हैं। कुछ समय बाद एकांत (निर्जन) में जिंदगी बिताते नजर आते हैं।

6- बिल्ली या नेवले के रास्ता काट जाने पर, घर से निकलते ही छींक आने पर या खाली बाल्टी देख कर वापस नहीं लौटना पड़ता।

यह अच्‍छी बात है कि आपको तार्किक होने के लिए अपना ढोंग छोड़ना पड़ा है। आस्तिक बिल्‍ली और नेवले दोनों में ठाकुरजी के दर्शन करता है।

7- किसी कार्य की संभावित सफलता के लिए किसी देवी देवता को तेल लगाने की जरूरत नहीं पड़ती।

केवल संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के पिछवाड़े को ही संभालने की जरूरत बाकी रहती है।

8- गंदगी और बदबू भरे गंगा जल में नहाने की मजबूरी नहीं झेलनी पड़ती।

पहले आस्तिक रहकर आपने गंगाजी को गंदा किया और अब उससे पिंड छुड़ाने के लिए आप नास्तिक हो गए हैं। अपनी जिम्‍मेदारियों से कब तक भागते रहेंगे।

9- कोई भी शुभ काम शुरू करने के लिए सत्यनारायण की कथा सुनके अनुमति नहीं लेनी पड़ती।

अगर कोई शुभ काम करने के लिए ठाकुरजी का नाम लेने के बजाय आप पूरी सत्‍यनारायण की कथा सुनते रहे हैं तो बहुत अंधेरे में जिंदगी बिता ली है। आपको बहुत समय पहले ही नास्तिक हो जाना चाहिए था। आप आस्‍था को समझे बिना ही आस्तिक हो गए थे, सही कहूं तो केवल ढोंगी भर ही हो पाए थे।

10- नरक में जाने के डर से हर चबूतरे, देवोत्थान, लाल झंडा लगाए जगह पर सर नहीं झुकाना पड़ता।

इसी के साथ अनैतिक, अधार्मिक और पाप कर्म करने का लाइसेंस भी मिल गया है। अच्‍छा है कि आस्तिक लोग नर्क जाने का डर मात्र से ही बुराइयों से अब भी दूर हैं। आपका जीवंत नर्क आपको ही मुबारक।

11- 11, 21, 51 जैसी शुभ संख्याओं से कुछ लेना लादना नहीं।

इन संख्‍याओं के साथ अब तक क्‍या उखाड़ लिया जो अब 100, 1000 या 10000 में कर लेंगे। अच्‍छा किया जो ढोंग बंद कर दिया। जो चीज समझ में न आए उसे आस्तिक नास्तिक की आड़ लिए बिना भी रोका जा सकता था।

12- सुब्बे सुब्बे अखबार में राशिफल देख कर अपने दिन का शेड्यूल नहीं बनाना पड़ता।

अखबार में राशिफल पढ़कर टाइमटेबल बनाने की नौटंकी कौन करता है, मुझे आजतक एक नहीं मिला। सब अपने बहानों के लिए ही इनका इस्‍तेमाल करते दिखाइ देते हैं। अगर एक भी बंदे का दस, बीस या पचास साल पुराना टाइमटेबल राशिफल के आधार पर लिखा मिल जाए तो विश्‍व के बड़े आश्‍चर्य में शुमार होगा।

13- ज़िन्दगी मस्ती से कटती है छोटी छोटी खुशियों में बड़ा बड़ा मजा लेते हुए।

ये तो आस्तिक रहते हुए भी कर सकते थे, हां मस्‍ती कंडोम और माइ च्‍वाइस के बारे में खुलकर बोलने के लिए पहले समाज, देश और धर्म को लेकर कुुछ बाध्‍याताएं थी, अब नास्तिक होकर सड़क पर नंगे नाच सकते हो…
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हे नास्तिक, तुम्‍हें शर्म क्‍यों नहीं आती, अपनी कमजोरियों को धर्म का नाम देते हुए…

 

 

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मूल लिस्‍ट यह थी

1- किसी भूत प्रेत, पीपल बरगद से डर नहीं लगता।
2-सांप बिच्छू तक से डर ख़त्म हो गया है प्यार बढ़ जाता है।
3- पूजा पाठ- कथा प्रवचन में चवन्नी खर्च नहीं होती।
4- गाय और कुत्ते पर एक समान प्यार आता है।
5- अपने किये अच्छे काम का क्रेडिट खुद को मिलती है और गलती होने पर हरि इच्छा न मान कर उसे आगे दोहराने से परहेज करने लगता है।
6- बिल्ली या नेवले के रास्ता काट जाने पर, घर से निकलते ही छींक आने पर या खाली बाल्टी देख कर वापस नहीं लौटना पड़ता।
7- किसी कार्य की संभावित सफलता के लिए किसी देवी देवता को तेल लगाने की जरूरत नहीं पड़ती।
8- गंदगी और बदबू भरे गंगा जल में नहाने की मजबूरी नहीं झेलनी पड़ती।
9- कोई भी शुभ काम शुरू करने के लिए सत्यनारायण की कथा सुनके अनुमति नहीं लेनी पड़ती।
10- नरक में जाने के डर से हर चबूतरे, देवोत्थान, लाल झंडा लगाए जगह पर सर नहीं झुकाना पड़ता।
11- 11, 21, 51 जैसी शुभ संख्याओं से कुछ लेना लादना नहीं।
12- सुब्बे सुब्बे अखबार में राशिफल देख कर अपने दिन का शेड्यूल नहीं बनाना पड़ता।
13- ज़िन्दगी मस्ती से कटती है छोटी छोटी खुशियों में बड़ा बड़ा मजा लेते हुए।

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