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पतंगों की लूट

इन दिनों बीकानेर में पतंगों का जोर परवान पर है। कोई छतों पर पतंग उड़ा रहा है तो कोई लूटने में व्‍यस्‍त है। सड़कों पर छोटे बच्‍चों से लेकर उम्रदराज तक कटी पतंगों को देखकर लूटने का प्रयास करते दिखाई दे रहे हैं…

मुझे लगता है पतंग लूटना इंसान की लूटने की प्रवृत्ति का सहज रूप है। दो रूपए की पतंग लूटने पर साथ में दस या बीस रुपए का मांझा तक मिल जाता है, लेकिन किसी को मांझे की परवाह नहीं होती। मांझे को सहज तोड़कर फेंक दिया जाता है और लुटेरा महज दो रुपए की पतंग को लूटकर विजयी भाव से हवा में लहराता है।

जयपुर में मरक संक्रांति और बीकानेर में अक्षय तृतीया पर होने वाली इस लूट का इंसानी मनोविज्ञान पर भी गहरा प्रभाव होता होगा।

कहीं पतंग लूटने के बाद इंसान की लूटने की प्रवृत्ति का शमन होता होगा…

अगर ऐसा है तो पूरे देश में पतंग उड़ाने और लूटने की प्रतियोगिताएं होनी चाहिए, ताकि लोग सार्वजनिक संपत्ति की लूट बंद कर पतंगे लूटकर अपनी कुंठा का समाधान कर लें….

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