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घट घट में राम

गुणपूजक सनातन मान्‍यता में राम भी एक रूपक ही हैं। सनातनी देव केवल ईश्‍वरीय सत्‍ता का डर दिखाने या विशिष्‍ट हो जाने के लिए नहीं हैं। वे गुणों के साथ अव‍तरित होते हैं। जब मैं उनकी उपासना करता हूं तो वही बन जाता हूं। गणेश की अाराधना करूंगा तो गणेश हो जाउंगा, विष्‍णु की करूंगा तो विष्‍णु हो जाउंगा।

विष्‍णु मेरे परमपिता नहीं है, मेरा ही पूर्ण रूप है, मैं अधूरा विष्‍णु हूं और एक दिन पूर्ण विष्‍णु तक पहुंचना है। अधूरा गणेश हूं, एक दिन पूर्ण गणेश बनना है, अधूरा राम हूं एक दिन पूरा राम बनना है। अधूरी शक्ति हूं, एक दिन पूर्ण शक्ति बनना है। मेरा राम मुझसे ही है और मुझमें ही है। बाहर कहीं नहीं।

हर राम के अपने गुण हैं। बस उन गुणों को आत्‍मसात करना है, उसी से पूर्णता मिलेगी।

ठुमक चलत रामचंद्र हैं
गुरु से शिक्षा ग्रहण करते रघुराई हैं
उपवन में अपनी शक्ति की ओर ताकते राम हैं
शक्ति के ओज में शिव का धनुष तोड़ते राम हैं
पिता के वचन के लिए वन को प्रस्‍थान करते राम हैं
केवट के आगे असहाय दिखते राम हैं
शबरी के बेरों का रसास्‍वादन करते राम हैं
स्‍वर्ण हरिण का पीछा करते राम हैं
बाली पर छिपकर बाण चलाते राम हैं
अपनी शक्ति के लिए विह्ल होते शक्ति पूजक राम हैं
शक्ति उपासक शिव की स्‍थापना करने वाले राम हैं
समुद्र पर कमान ताने राम हैं
वानरों की सेना को राक्षसों से भिड़ा देने वाले राम हैं
लक्ष्‍मण के लिए विलाप करते राम हैं
रावण का वध करते राम हैं
रामराज्‍य की स्‍थापना करने वाले राम हैं
रावण से भी छीनकर लाए अपनी शक्ति को तज देने वाले राम हैं
अपने पुत्रों को देख विह्ल हो जाने वाले राम हैं

एक ही राम में कितने राम हैं, हर राम मुक्ति दिलाने वाले राम हैं, हर एक में राम हैं और राम में राम हैं।
इसीलिए भारतीय मानस कहता है घट घट में राम हैं।

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