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गंदगी पर खर्च

वे साधू थे, सनातनी नहीं थे, कोई दूसरे थे, भ्रमण करते गाँव पहुंचे तो प्रसिद्धि पहले पहुंची।

सेठ सेवा में आया तो पूछा क्या हुआ मेरी व्यवस्था का, सेठ ने कहा यहाँ सारी गंवार और गन्दी है, शहर में व्यवस्था करवा दूंगा।

ज्ञान प्राप्त साधू ने मुस्कुराते हुए कहा गन्दी है तो 5 रुपये साबुन की टिकिया के ही तो खर्च होंगे।

ले आओ…

(सत्य घटना पर आधारित)

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