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क्‍यों जाते हो ज्‍योतिषी के पास ??

हाई स्कूल में हमारे एक मास्टर जी थे .. पंडी जी ।
संस्कृत और हिंदी पढ़ाते थे… इन दोनों विषयों के वो प्रकांड विद्वान थे.. आचार्य की डिग्री भी लिए थे.. और ज्योतिष शास्त्र के भी अच्छे खासे ज्ञाता थे.. नाम था श्याम लोचन झा।
एक बार वो अपनी आप बीती सुना रहे थे..
एक बार हम घर में बैठे हुए थे…. रामेसर महतो नाम करके एक आदमी आया.. आते ही ‘प्रणाम पंडी जी’ करके अभिवादन किया .. मैं बहुत ही गदगद हो गया.. बैठने को कहा और आने का प्रयोजन पूछा .. तो वो बताया कि , “पंडी जी … तनिक पतरा देखिये न.. ई महीना में कोनो अच्छा सा लगन है क्या… ? ”
मैंने पतरा निकाला और देखने लगा… देखने के बाद मैंने 2 बहुत ही अच्छे लगन की तारीख बताया .. उसके बाद वो फिर बोला , ” पंडी जी हमरे बेटवा का नाम अमुक है और लड़की का नाम अमुक है.. ज़रा देखिये तो राशि एकदम बराबर है कि नहीं ?”
मैं फिर देखने लगा… देखने के बाद बताया कि.. ”अरे एकदम फस क्लास जोड़ी है.. कोई गड़बड़ सड़बड़ नहीं है.. कोई ग्रह-दोष नहीं हैं.. मैंने जो दो तारीख बताये है न उसमें आप निश्चिन्त हो के शादी कीजिये। “.
इसके बाद वो रामेसर महतो उठा और ‘ठीक है पंडी जी.. बहुत धन्यवाद .. अब हम चलते है’.. बोल के पिछवाड़े पे हाथ फेरते हुए बाहर जाने लगा..
मेरे को उस टाइम इतना गुस्सा आ रहा था कि मत पूछो.. अगर उस टाइम मेरे हाथ में कोई बन्दुक होता न तो उसके गां## में गोली मार देता !!!
तुम सारे आधा पौन घण्टा आ के शादी के विषय में बात किये.. पतरा पोथी निकाल के तारीख और राशि जाने .. और उसके बाद बिना ‘दक्षिणा’ दिए ही गा## पोछते हुए वहाँ से निकल लिए !! कोई दक्षिणा वक्षिणा नहीं ?!!
तुम सारे जाओ न किसी MBBS डाक्टर के पास .. हाथ का खाली नस पकड़ लिया न तो 200 रूपया चार्ज लेगा.. क्यों लेगा भाई ?? तुम काहे नहीं उससे फ्री चेक-अप करवा लेते हो ? … क्योंकि उसने बहुत ही मेहनत और पैसा खर्चा कर के MBBS की डिग्री ली है.. सो वह उसका हक़ बनता है !! … तो क्या हमने ‘ज्योतिष’ और ‘आचार्य’ की डिग्री झक मार के ली है ?? कोई भी ले लेता है क्या ये डिग्री ?? मेहनत, समय और पैसा नहीं लगता है क्या इसमें ?? कोई भी ऐरा गैरा ऐसी डिग्रियां ले लेता है क्या ??
मेरा किसी यजमान से ‘दक्षिणा’ लेना कोई पाड़ेगिरी करके ठगना नहीं है .. हाँ मार्केट में ऐसे पाड़े भी घूमते रहते हैं.. लेकिन मेरा किसी से ‘दक्षिणा’ लेना ठगना नहीं है.. बल्कि वो मेरा हक़ है… और देना आपका फ़र्ज़.. हाँ अगर आप देने में सक्षम नहीं हो तो कोई बात नहीं.. और अगर ये सब चीजें आपको ठगने का जरिया मात्र और ढोंग-ढकोसला लगता हैं तो, आप आओ मत.. आते क्यों हो ? .. मैं किसी को नहीं बुलाता हूँ.. कोई ज़ोर-ज़बरदस्ती नहीं है.. और अगर आते हो तो मेरा हक़ देते जाओ। .
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मुझे पंडी जी की बातें एकदम करेक्ट लगी.. आज जितने भी प्रोफेशनल्स हैं.. सब अपना हक़ लेते हैं.. और पुरे अधिकार के साथ लेते हैं।।
आज मैं एक इंजीनियर.. तो क्या मैं आपको फ्री में कोई ‘Drawing’ बना के दे दूंगा ? नहीं.. उसका पूरा मेहनताना लूंगा और पुरे हक़ के साथ लूंगा।
और रही पंडी जी के ज्योतिष की बात तो अगर आपको ज्योतिषी में विश्वास है और किसी ज्योतिष के पास जाते हैं तो उसका हक़ देना आपका फ़र्ज़ बनता हैं.. नहीं तो वो किसी को बुलाते नहीं हैं।
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जय श्री राम
गंगा महतो
खोपोली।

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