new thought

किताबत संप्रदाय और ईश्‍वर

एक बड़ी समस्‍या यह भी है कि किताबत संप्रदायों ने हमें हमारे ईश्‍वर से डरना सिखा दिया। सनातन मान्‍यता में यह तो कहा जाता है कि शक्ति का गलत इस्‍तेमाल करोगे तो शक्ति अनर्थकारी परिणाम देगी, लेकिन कहीं भी ईश्‍वर द्वारा दण्डित किए जाने का प्रावधान नहीं दिखाई देता।

इंद्र नाराज होते हैं तो भीषण वर्षा करेंगे या बिल्‍कुल वर्षा नहीं करेंगे। यह उनके अधिकार क्षेत्र की बात है, इससे अधिक घुसपैठ वह नहीं करते।

अग्नि नाराज होगी तो जलाएगी या तेज समाप्‍त कर देगी। इसी तरह हर देवता रुष्‍ट होने पर अपने हिस्‍से के एलीमेंट को ही प्रभावित करेगा, न कि साधक के जीवन के हर कोण में घुसकर उसे नीति धर्म बताता रहेगा। कि ऐसा करोगे तो सुरक्षित रहोगे, वरना देवता तुम्‍हारा कुछ छीन झपट लेंगे या अधिक दे देंगे।

बाद के काल में उत्‍तर वैदिक देवाताओं ने चाहे यूनान ये उधार लिया या कमजोर होती मानसिकता पर हमला किया, कुल मिलाकर

“बुलाने पर नहीं आने”
और
“अपने हिसाब से दण्‍ड निर्धारित करने”

का काम हाथ में ले लिया। यही कारण है कि आज हमारे ईष्‍ट हमारी इच्‍छा पर हमें कुछ देने के बजाय हमें प्रतिक्षण निर्भर और कमजोर बनाने लगे हैं। यह कमजोरी आखिर में उदात्त कट्टरता के रूप में सामने आने लगी है। 😦

हम ऊपर चढ़ रहे हैं या नीचे गिर रहे हैं, यह तय करना भी मुश्किल होता जा रहा है।

Advertisements