politics · sidharth joshi

सांड की कहानी

मैं एक सांड को जानता हूं। वो मंडी में घूमता है और किसी भी ठेले में मुंह मारकर ताज़ी हरी सब्ज़ियाँ खा लेता है। वो बहुत खूबसूरत और बलिष्ट है। ऐसा कि मंडी की शोभा की तरह दिखाई देता है। कोई उसका कुछ बिगाड़ नहीं पाता। यहां तक कि जब भी नगर निगम के कर्मचारी उसे पकड़ने आते हैं तो वही दुकानदार और ठेले वाले उसे पकड़ने का विरोध करते हैं। सब्जी खा जाता है लेकिन प्रिय है।

एक लड़के ने उसकी एक कमजोरी पकड़ ली। वो ये कि जब भी सांड की पूँछ मरोड़ो तो वह आगे खड़े ग्राहक या ठेले की तरफ सींग घुमाता है।

इससे धीरे धीरे सांड बदनाम होने लगा। आखिर एक दिन निगम वाले सांड को पकड़ने आये तो बाजार में अधिकाँश ने कोई विरोध नहीं किया। अब सांड को जंगल में छोड़ दिया गया है। हालांकि अब भी वह हरा चारा खाता है और मस्त रहता है। लेकिन अब पहले वाली शान नहीं रही।

पूरी कहानी में सिर्फ एक समस्या है कि सांड प्रतिक्रियावादी है।

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