मसाला · sidharth joshi

धंधा

मेरे एक पत्रकार दोस्‍त हमेशा अपनी नौकरी और काम से असंतुष्‍ट रहते हैं। अपने पेशे के चलते उन्‍हें घूमना होता है। जहां कहीं देखते हैं कि यहां कम काम में अच्‍छी कमाई हो रही है, वहां उनका डॉयलॉग होता है “ये धंधा ठीक है, अब यही करेंगे” फिर कुछ दिन धुन बनी रहती है, फिर “नॉर्मल” हो जाते हैं।

एक बार बीकानेर में राज्‍यपाल का दौरा हुआ और उनकी ड्यूटी लग गई रिपोर्टिंग में…

वापस आकर बोले ये राज्‍यपाल वाला धंधा…

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