sidharth joshi

खाना खाते समय

शाम ढल रही थी, वो घर लौटने की जल्‍दी में थे, कि माताजी थाली परोसकर ही ले आई, बोली चले जाना, एक रोटी खा ले, ना नुकर करते करते भी उन्‍होंने थाली हाथ में ले ली, मां के हाथ का स्‍वादिष्‍ट खाना एक रोटी से उनकी तीन रोटी की पूरी खुराक तक पहुंच गया, खाते खाते इतना भावुक हुए कि बोले

“मैंने कल ही सपना देखा था कि स्‍वादिष्‍ट सब्‍जी और गर्मागरम रोटियां खा रहा हूं”

इसके बाद होश आया तो मुंह घुमाकर पत्‍नीजी की ओर देखा, तब तक तीर क्‍या कहें भाला निकल चुका था। बाकी बातें इतिहास का भाग है।

मोरल : खाना खाते समय बोलते नहीं हैं

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