democracy · sidharth joshi

क्रिकेट और मदिंरों की कमाई

कुछ बातें बहुत सरल और स्‍पष्‍ट होती हैं, फिर भी अधिकांश लोग उन्‍हें न समझने का भ्रम पाले रखते हैं।

भारत सरकार ने देवस्‍थान विभाग बनाया, इस बहाने कि मंदिरों की देखभाल करेगी, आप मैं और सभी जानते हैं कि मंदिरों की कैसी देखभाल हो रही है, बल्कि अधिकांश लाभकारी मंदिरों का पैसा सरकार हड़प ही कर रही है। दक्षिण भारत में तो मंदिरों के पैसों से किताबत संप्रदायों के धार्मिक स्‍थलों तक को पनपाया गया।

भारत में क्रिकेट में सबसे ज्‍यादा कमाई होती है और दूसरे खेल आधारभूत सुविधाओं को तरसते रहते हैं। फिर भारत सरकार क्रिकेट को गोद क्‍यों नहीं ले लेती, ठीक देवस्‍थान विभाग की तरह क्रिकेट विभाग बनाकर, क्‍यों बीसीसीआई को स्‍वायत्‍त संस्‍था बनाकर रखा गया है। क्रिकेट से होने वाली आमदनी को हॉकी, फुटबॉल, एथलेटिक्‍स, कुश्‍ती, कबड्डी, तैराकी, शतरंज, जिम्‍नास्टिक, बॉस्‍केटबॉल जैसे खेलों में क्‍याें नहीं लगाती।

क्‍या मंदिर जाना अपराध है या क्रिकेट के अलावा दूसरे खेल भ्रष्‍ट हैं ??
या नेताओं ने अपनी कमाई के लिए यह सामानान्‍तर स्रोत सुरक्षित रख छोड़ा है

क्‍या क्रिकेट में सट्टा नहीं होता, अगर होता है तो सरकार इसे वैध कर क्‍यों नहीं कमाई करती? या इस पर पूर्णतया प्रतिबंध क्‍यों नहीं लगाती? क्‍या इससे विशेष रुचि वाले लोगों को विशेष फायदा होता है ??

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