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आजादी का दिन

ताज होटल आतंकी हमले की जद में आया और वहां नुकसान हुआ। बाद में आतंकी मारे और पकड़े गए, और ताज आतंकियों से आजाद हुआ, क्‍या आप जानते हैं होटल ताज में एक बार भी आतंकी हमले की बरसी नहीं मनाई गई, क्‍योंकि इससे गलत संदेश जाता है…

हजारों साल से चल रही सनातन परम्‍परा को मूर्खों की पिपहरी बनाने के लिए एक दिन निश्चित किया जाता है, जहां न सुभाष है, न भगत है न सुखदेव और राजगुरू…

कुछ केजरीवाल जैसे तत्‍व अफरा तफरी के बीच पूरे सिस्‍टम को हथिया लेते हैं और आखिर सामने आता है एक गणतंत्र... हर साल याद करने के लिए एक दिन कि हां हमें सैकड़ों साल तक लूटा गया था…

शहीदों को याद करने और हमारी सेनाओं के शक्ति प्रदर्शन के लिए कुछ अधिक आत्‍मसम्‍मान वाला दिन नहीं चुना जाना चाहिए था ??

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