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A Billion ideas : What an idea!!

सौ करोड़ विचारों में मेरे दो विचार

पिछले दिनों दिल्‍ली में एक अलहदा ब्‍लॉगर मीट हुई। अलहदा इस कोण से कि एक राजनीतिक पार्टी ब्‍लॉगरों के विचार जानना चाहती थी। कांग्रेस के ए बिलियन आइडियाज (A Billion ideas) के तहत करीब तीस हिंदी पट्टी के ब्‍लॉगरों को दिल्‍ली आमंत्रित किया गया था। खास बात यह रही कि आमंत्रण के साथ एक बात की तस्‍दीक कर दी गई थी कि दिए गए विषयों में आपको विचार तो करना है, लेकिन समस्‍या पैदा होने के कारणों के बजाय समस्‍या के समाधान पर अधिक ध्‍यान देना है। यह अलग बात है कि गोष्‍ठी के दौरान हिंदी में कुछ तंग हाथ वाले संचालक बार बार इसे निदान कह रहे थे। वे चाहते यही थे कि समाधान बताएं जाएं। 
गोष्‍ठी में कुल जमा चार विषय रखे गए थे। इसके बारे में पहले भेजी गई मेल में स्‍पष्‍ट कर दिया गया था। कि चार विषय कौन कौन से होंगे ? 

Broad themes for the event are
– How to retain the inclusiveness and secular fabric of the nation
– How to harness the potential of youth for innovation
– How to empower women to have a greater say in the household decision making
– How to increase transparency in the governance at all levels.

इनमें से मैं स्‍पष्‍ट रूप से केवल दो ही विषयों पर बता सकता था। सो उन्‍हीं दोनों विषयों पर मैंने ध्‍यान केन्द्रित किया। पहला था यूथ पावर। यूथ पावर पर मेरे विचार कुछ इस प्रकार थे… 
यूथ पावर
“देश के युवाओं के सामने सबसे बड़ी समस्‍या रोजगार है। अगर युवाओं को अपने मन का काम मिल जाए तो युवाओं की शक्ति का सही उपयोग हो सकता है। अगर हमें ह्यूम सोर्स मैनेजमेंट को देखना है तो चीन की ओर देखना पड़ेगा। चीन ने एक बहुत शानदार काम किया। वर्तमान में भारत में मिल रहे टैबलेट, मोबाइल और लैपटॉप चीन से बनकर आ रहे हैं। चीन दुनिया का सबसे बड़ा एक्‍सपोर्टर है। इसका कारण यह नहीं है कि चीन की सरकार ने बड़ी फैक्ट्रियां लगाई या बड़े उद्योगपतियों की सहायता की। बजाय इसके चीन में प्‍लास्टिक और मोबाइल बनाने के सामान को सब्सिडाइज्‍ड किया गया और छोटे उद्यमियों को प्रोत्‍साहित किया गया। इसका नतीजा यह हुआ कि आज चीन में मोबाइल और इस प्रकार के दूसरे गैजेट्स की कॉटेज इंडस्‍ट्री बन गई। छोटे छोटे उद्यमियों को सरकार की इतनी सहायता प्राप्‍त है कि उन्‍हें अपना माल अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में बेचने के लिए किसी प्रकार की अतिरिक्‍त कसरत नहीं करनी पड़ती। वहीं हम अपने देश में देखें तो पता लगता है कि इस प्रकार की इंडस्‍ट्री लगाने के बजाय सरकारें मुफ्त लेपटॉप, टैब और मोबाइल बांट रही है। उत्‍तरप्रदेश और राजस्‍थान में ही राज्‍य सरकारों ने करीब सात लाख टैब का वितरण कर दिया। लेकिन किसी ने भी यहां टैब की उत्‍पादन इकाई स्‍थापित करने पर विचार नहीं किया। हमने चीन से टैब खरीदे और यहां के विद्यार्थियों को बांट दिए। इससे न तो हमें तकनीक के विकास का लाभ मिला न ही स्‍थानीय उद्यमी विकसित हुए। जैसा कि हम जानते हैं कि यह गैजेट्स जल्‍द ही पुराने पड़ने वाले हैं। यानी दो साल बाद इनकी कोई कीमत नहीं रहेगी। तो दूसरे शब्‍दों में कहा जाए तो हमने अपना दोहरा नुकसान किया। सात लाख टैब और मोबाइल के रूप में हम प्‍लास्टिक का कबाड़ खरीदकर एकत्रित करते जा रहे हैं। हमारी सरकार को नव उद्यमियों का सहयोग कर यहां पर भी ऐसी छोटी छोटी एसेंबली यूनिट्स बनानी चाहिए। ताकि स्‍थानीय उद्यमी विकसित हों, बेरोजारों को रोजगार मिले और तकनीक का विकास हो।”
सेक्‍युलर फाइबर
“इस मुद्दे पर मेरा विरोध और विचार एक ही बात है। दरअसल मेरा मानना है कि धर्म नितांत व्‍यक्तिगत विषयवस्‍तु है। सरकार अथवा राज्‍य का इसमें कोई दखल नहीं होना चाहिए। हम धर्मनिरपेक्ष राष्‍ट्र हैं। इसका क्‍या अर्थ लगाया जाए। क्‍या सभी धर्मों में राज्‍य और सरकार को टांग फच्‍चर करनी चाहिए या सभी धर्मों को सम्‍मान देते हुए उन्‍हें अपने स्‍तर पर निपटने देने के लिए छोड़ देना चाहिए। एक सरकार सेक्‍युलर हो सकती है जब वह सभी धर्मों का सम्‍मान करे। लेकिन इससे सरकार को धर्म के भीतर छेड़छाड़ करने या लाभ अथवा दंड से प्रभावित करने का अधिकार तब भी सरकार को नहीं मिलता है। ऐसे में किसी सरकार या शासन की जिम्‍मेदारी बनती है कि राज्‍य के किसी भी व्‍यक्ति को धर्म के आधार पर न तो दंडित किया जाए न ही लाभ दिया जाए। ऐसे में सरकार सेक्‍युलर बनी रह सकती है। यह तभी हो सकता है जब राज्‍य की शक्तियों से मिलने वाले हर प्रकार के लाभ और धर्म (या कहें संप्रदाय) को अलग कर दिया जाए। वर्तमान में सरकारें एक तरफ कानून बना रही हैं कि लाउडस्‍पीकर नहीं बजाया जा सकता तो दूसरी तरफ धर्म या संप्रदाय के आधार पर लाउडस्‍पीकर बजाने की छूट दी जा रही है। एक तरफ सरकार धार्मिक स्‍थल की यात्रा के लिए सब्सिडी और राहत पैकेज जारी कर रही है तो दूसरी ओर कर लगाया जा रहा है। ये दोनों ही स्थितियां एक सेक्‍युलर सरकार के लिए घातक हैं। इससे आम आस्‍थावान नागरिक सरकार को किसी समुदाय विशेष की ओर झुका हुआ मानने लगता है और उसका विश्‍वास राज्‍य पर से उठने लगता है।”
इन दोनों विचारों के अलावा और भी कई मुद्दों पर टेबल शेयर कर रहे साथियों के साथ चर्चा हुई। चर्चा के दौरान कई मुद्दों पर मेरी सहमति बनी तो कई पर मैं सहमत नहीं था। चर्चा के दौरान कई बार लगा कि अलगा व्‍यक्ति मेरे ही विचार बोल रहा है। यह तो नहीं कहा जा सकता कि जो दूसरे ब्‍लॉगर्स ने बोला मेरे भी विचार वैसे ही थे, लेकिन कमोबेश ब्‍लॉगरों के दिमाग में आने वाले भविष्‍य की तस्‍वीर दिखाई दे रही थी। भले ही एक पार्टी ने अपने खर्च पर ब्‍लॉगर मीट कराई, लेकिन देश के अलग अलग कोनों में स्‍वांत सुखाय लेखन कर रहे ब्‍लॉगरों ने जब अपने विचार रखे तो एक सार्थक निष्‍कर्ष निकलता दिखाई दिया। इस सार्थक बहस और मीट के लिए मैं कांग्रेस के ए बिलियन आइडियाज प्रोजेक्‍ट को साधूवाद देता हूं। 
ब्‍लॉगर मीट के आयोजकों ने मुझे कहा है कि शीघ्र फोटो भेज दिए जाएंगे। जब फोटो मिलेंगे तो उन्‍हें भी यहां चस्‍पा कर दिया जाएगा… 🙂 
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