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वाल मार्ट को आने दो

ऐसा नहीं है कि मैं रिटेल दुकानदारों के विरोध में हुं या बड़ी कं‍पनियां मुझे उनका समर्थन करने के लिए पैसा दे रही हैं। ना ही मैं केन्‍द्र सरकार का मुलाजिम हूं। इस सबके बावजूद मैं चाहता हूं कि विदेशी कंपनियां देश में सीधा निवेश करें और यहां के लोगों को वह सब चीजें उपलब्‍ध कराएं जिसके वे हकदार हैं। यकीन जानिए कि वे कंपनियां यहां व्‍यापार कर यहां से बहुत कुछ नहीं ले जा पाएंगी। कुछ लोग इस प्रकिया को इस्‍ट इंडिया कंपनी का लौटना तो कुछ स्‍थानीय बाजार से टूटने से जोड़ रहे हैं, लेकिन हकीकत इससे कुछ अलग है। हो सकता है वाल मार्ट आठ या दस साल में यहां फेल होकर लौट जाएं। कैसे ?

ऐसा नहीं है कि अमरीका का यह मल्‍टीस्‍टोर हमेशा सफल ही रहा है। खुद को आर्य बताने वाले जर्मनों और एशिया की खुद के दम पर खड़ा होने की कोशिश कर रही एक शक्ति दक्षिण कोरिया ने वाल मार्ट को फेल कर दिया। अब यही स्थिति वाल मार्ट की भारत में भी हो सकती है, लेकिन इससे पहले वाल मार्ट हमें वो दे जाएगा जिसे देने में बड़े दुकानदार हमेशा हिचकिचाते रहे हैं।

पहले इस स्‍टोर की खासियत

यह स्‍टोर धनिया से लेकर टाइटन घड़ी तक और बादाम से लेकर महंगे परिधानों तक हर चीज बेच लेता है, जो आपके दैनिक जीवन का जरूरी हिस्‍सा है। इसके स्‍टोर कई बार किलोमीटर में फैले होते हैं। आपको अपनी पसंद की हर चीज का चुनाव करने की आजादी मिलती है। डिस्‍काउंट मिलते हैं। ग्राहक यहां देवता है और दुकानदार उसका पुजारी। किसी भी उपभोक्‍तावादी व्‍यवस्‍था की यह चरम अवस्‍था कही जा सकती है। नए उत्‍पाद, नई जानकारियां और कीमतों में कटौती की जिम्‍मेदारी कंपनी की होती है और आम आदमी के पास विकल्‍पों का ढेर होता है। आज बाजार उपभोक्‍ता को अपने घटिया उत्‍पाद से रिझाता है और बेहतर माल ‘कुछ लोगों’ तक सीमित कर दिया गया है, वहीं यह स्‍टोर एक तरह का लोकतंत्र बनाता है जो यह कहता है कि जो पैसा देगा वो माल ले जाएगा।

जर्मनी में फेल होने के प्रमुख कारण

आपको जानकार सुखद आश्‍चर्य होगा कि हजारों करोड़ रुपए कमाने वाले मार्ट जर्मनी में गए तो वहां बहुत कुछ खोकर वापस बाहर आ गए। उन्‍हें वहां विफलता का कडुवा स्‍वाद मिला। कैसे मिला, Andreas Knorr and Andreas Arndt के एक लेख में इसे स्‍पष्‍ट किया गया है। उन्‍होंने लिखा कि

Clearly dominating the US retail market, Wal-Mart expanded into Germany (and Europe) in late 1997. Wal-Mart’s attempt to apply the company’s proven US success formula in an unmodified manner to the German market, however, turned out to be nothing short of a fiasco. Upon closer inspection, the circumstances of the company’s failure to establish itself in Germany give reason to believe that it pursued a fundamentally flawed internationalization strategy due to an incredible degree of ignorance of the specific features of the extremely competitive German retail market. Moreover, instead of attracting consumers with an innovative approach to retailing, as it has done in the USA, in Germany the company does not seem to be able to offer customers any compelling value proposition in comparison with its local competitors. Wal-Mart Germany’s future looks bleak indeed.

ऐसे में भारत की आबोहवा को समझना मैं समझता हूं कि वाल मार्ट के लिए जर्मनी से अधिक कठिन होगा। यहां गंदगी के बीच पसरी हुई सब्जियों में से लाल सुर्ख टमाटर को कच्‍ची भिंडियां तलाश लेने वाले भा‍रतियों को सजे संवरे स्‍टोरों तक खींचना टेढ़ा काम होगा। और मोल भाव के बिना कोई चीज ले लेना, इसे तो असंभव ही जानिए। इसके चलते वाल मार्ट कंज्‍यूमर सेटिस्‍फेक्‍शन इंडेक्‍स में सबसे नीचे आएगा। वह कहता है माल पड़ा है, लेना है तो लो वरना चलते बनो। हम यह कभी बर्दाश्‍त नहीं कर सकते।

कोरिया में फेल होने के कारण

कोरिया के लोगों की खासियत जानें तो पता चलेगा कि वहां के लोग वालमार्ट के प्रति कैसे प्रतिक्रिया कर सकते हैं- एक बानगी-

Korea : The men are proud, masculine, patriot, somewhat militant, but in a good way. There’s a mix of strong, expansive, traditional values, along with a large minority undercurrent of modernity. It’s really good – it’s the best of all possible worlds. There’s problems – the blatant racism and xenophobia kind of sucks, but I don’t mind it so much. Nowhere’s perfect.

वहीं वाल मार्ट के रैवेये के बारे में आप समझ सकते हैं कि कैसा रहा होगा। एक  लेखक Sebastian जैसा बताते हैं-

Walmart has really, really low prices. There’s a few reasons for this – the company is one of the best in the world at logistics, so they manage to have fast turnover of inventory without keeping too much onhand at any given store. I’d love to see how their logistics division runs sometime – I remember reading that they’ve got some of the most sophistication about predicting and automatically changing stock at stores based on factors like the weather changing that are hard to pin down.

ऐसे में भारतीय बाजार की विशिष्‍टता ही इसका सुरक्षा कवच है। हमें कदापि चिंतित नहीं होना चाहिए कि एक बाहरी दैत्‍य हमारे बाजार में प्रवेश कर रहा है।

हमें क्‍या फायदा है

तो सवाल पैदा होता है कि हमें क्‍यों विरोध नहीं करना चाहिए हमें क्‍या फायदा है- इसका स्‍पष्‍ट कारण है कि स्‍थानीय बाजार के बड़े खिलाडि़यों और स्‍थानीय खिलाडि़यों के साथ काम कर रहे बाहरी खिलाड़ी भी अब तक हमें उन सभी उत्‍पादों से महरूम रखे हुए हैं जो कंपनी की तुलना में उपभोक्‍ताओं के लिए फायदे का सौदा है। सो, वाल मार्ट से सबसे बड़ा नुकसान उन धन्‍ना सेठों को होगा, जो अधिक फायदे वाले सौदों में निवेश कर उपभोक्‍ताओं को उनकी जरूरतों से महरूम रख रहे हैं। गलाकाट प्रतिस्‍पर्द्धा सेठों का मुनाफा कम करेगी, न कि रिटेलरों को फायदा। गली गली घूमकर फेरियां लगा रहे दुकानदारों को नुकसान कम और फायदा अधिक होगा, क्‍योंकि बड़े स्‍टोर सेल में जो सामान निकालेंगे वे सामान बाद में ठेलों पर आएंगे और रिसाइक्लिंग में मास्‍टर भारतीय उपभोक्‍ता ठेले वालों का बेसब्री से इंतजार करेंगे। हो सकता है ली की जींस या एचटीसी का फोन भी हमें ठेले पर खरीदने को मिल जाए Smile 

 

स्‍वागत वाल मार्ट…

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8 विचार “वाल मार्ट को आने दो&rdquo पर;

  1. ग्राहकों को सस्ता मिल जाना ही तो अर्थव्यवस्था का तो उद्देश्य नहीं, धन और संसाधन समुचित ढंग से ही बटे, रोजगार भी हो।

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  2. प्रतिस्पर्धी देसी कम्पनियों का नुकसान तो होगा मगर उनके नुकसान से होने वाला फायदा विदेशी कम्पनी को मिलेगा , उपभोक्ता को नहीं …बाजार में सड़े गले में से चुन लेने लायक ये कुछ छोड़ेंगे तब ना …मगर ये सच है कि पहले से स्थापित देसी कम्पनियों की भेडचाल देखते हुए कई बार ऐसा सोचने पर मजबूर होते है कि आने दो इन विदेशी कम्पनियों को , हम भारतीय इसी लायक हैं !

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  3. हमारी मानसिकता हमेशा ही हमें आगे बढ़ने से रोकती रही है , विश्व बाज़ार में जाने लायक और खड़े रहने लायक हिम्मत और आत्मविश्वास कहाँ से लायेंगे हम देसी !शुभकामनायें वालमार्ट के लिए !आभार अच्छे लेख के लिए , नक्कारखाने में तूती के लिए..

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