b.k. school · portrait · yogendra

वो उसे क्‍या आता है… मैं बनाता हूं…

बीके स्‍कूल में मेरे साथ योगेन्‍द्र पढ़ता था। स्‍कूल छोड़ने के करीब पंद्रह साल बाद एक दिन योगेन्‍द्र मिला। मैं चहका, पूछा क्‍या कर रहे हो। उसने कहा चित्र बनाता हूं। मैंने कहा वो तो ठीक है, लेकिन करते क्‍या हो। वो सचमुच चिढ़ गया। मुझसे पूरी बात ही नहीं की। यानि जितनी भी बातचीत हुई उसमें वह मुझ पर झल्‍ला अधिक रहा था और बात कम कर रहा था।
मैंने उसके बारे में पता किया। पहले बीकानेर में चित्रकला में स्‍नातक किया। बाद में एमएफए करने के लिए जयपुर चला गया था। दिल्‍ली और मुम्‍बई में कई अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर की प्रदर्शनियों का आयोजन करने के बाद उन दिनों बीकानेर में खाली बैठा था। जब वह अपनी रचनात्‍मकता के शीर्ष पर होता है तो सब काम धंधे छोड़कर खाली बैठ जाता है। बस सोचता रहता है। यह उसने बाद में बताया।
स्‍कूल के दिनों में वह काला और भद्दा था। पूरे चेहरे में केवल उसकी आंखें ही ऐसी थी जिन्‍हें आकर्षक कहा जा सकता है। आज बीस साल पीछे की ओर झांकता हूं तो लगता है कि उसने अपनी आंखों की चमक को बचाए रखा है। शायद बढ़ भी गई है। एक वही तो था जिसने अपने दिल की आवाज को सुना और उसी के रास्‍ते पर निकल पड़ा। छठी कक्षा में वह पूरे दिन चित्र बनाया करता था। अमिताभ बच्‍चन का वह जबरदस्‍त फैन था। सो पहले एक सादे कागज पर ग्राफ बनाता और एक सस्‍ता फोटो लेकर ग्राफ वाले कागज पर उसकी न‍कल बनाता था। दूसरे लड़के बहुत प्रभावित होते। मैं मुंह बना देता… इसमें क्‍या खास है। कोई भी बना सकता है। और चंपक में आए कार्टून मैं भी बना देता। सर से गुड भी मिल जाता। बाद में मैं चूहा दौड़ में शामिल हो गया और वह विशिष्‍ट बनता गया। पहली मुलाकात में हुई मुक्‍का लात के बाद में उसे मनाया और कहा कि मेरा भी एक पोर्टेट बना दे। यह बिल्‍कुल ऐसा आग्रह था जैसे अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर की फैशन डिजाइनर को पजामा सिलने के लिए दे दिया जाए। योगेन्‍द्र मुझे जानता था, सो मेरी बात का बुरा नहीं माना। बस टालता रहा। आज उसने एक गिफ्ट भेजा है। वही पोर्टेट.. अभी मैंने उससे बात नहीं की है, लेकिन शायद वह मेरी टकले वाली छवि को पसन्‍द नहीं करता था, सो अच्‍छी तस्‍वीर का इंतजार कर रहा था। मेरे तस्‍वीर बदलने के बाद उसने पोर्टेट बनाकर भेज दिया है। आप भी देखिए कैसा है…

छठी कक्षा में तो शायद उसे कुछ नहीं आता था, लेकिन बीस सालों की साधना के बाद कुछ तो निखार आया होगा.. मेरा तो अभ्‍यास छूट गया है।
sidharth joshi

योगेन्‍द्र अब बच्‍चों को सिखाता भी है। पिछले दिनों पत्रिका इन एज्‍युकेशन के समर स्‍कूल में उसने कई बच्‍चों को सीधी लकीरें खींचना सिखाया। उसका एक फोटो उसकी आईडी में से उठाकर लगा रहा हूं…

योगेन्‍द्र अपने शिष्‍यों के साथ

अपने शिष्‍यों के बीच खड़ा है बाएं से तीसरा… मुझे तो वह अब भी बच्‍चा ही लगता है… मुस्‍कान

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12 विचार “वो उसे क्‍या आता है… मैं बनाता हूं…&rdquo पर;

  1. दिल की बात को सुना यह अच्छा है, हर कोई यह कार्य नहीं कर पाता आपका पोर्ट्रेट तो अच्छा लग रहा है :)योगेन्द्र जी को भविष्य के लिए शुभकामनायें

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  2. patrakar mahoday or mitra gan. kala badha to kahaliya or bhi kuch kahalete bhadas nikal lete 3 sal ki kasar kyon rakhi.ye blog tumahara ustra hai kar lete bhadhar moka tha .saste mai chhod diya..mane socha monitor ke nate blog class mai murga banaoge muje .sari ramayan likhdi par ye nahi likha ki ye pajam jo maine sila hai wo wastaw mai pajama hai ki nahi hai..srajan apne aap mai kaam hai,or karma is dharma..ye ved kahata hai.achala ga ki meri char line se tumne 20 sal ki sari band line khol di antar man ki, halke to hue na tum..bas isi liye banaya aaj ye chitra tumahara gora chita par kaale dole wali aankhono ke sath..haha..baat to aatmauene karti hai sarir to sampreshan ka ojaar hai jo dwani se sanpreshan karta hai sanvad to atmaono ka hota hai ye hun mai..sam je.. is liye sochta hun sochta hun to kuch karta bhi hun..jese ki ye paijama sila aaj tumhari bhasha mai.. kher..mere to man ka bhar hata hai aaj tumhare liye portrait hjo sakta hai 3 sal se man par boj tha..dosto ke liye silent commited hun mai bachpan se hi..kya karu.bolo..

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  3. @ योगेन्‍द्र तूं नहीं बदलेगा… पर जैसा भी है मुझे पसन्‍द है। 🙂 रेखाओं के साथ तेरी कला का मैं कोई मुकाबला नहीं कर सकता, लेकिन गद्य लेखन में मैंने सालों बिताएं हैं और अपनी भावनाओं को बेहतरीन तरीके से पेश करने का तरीका जानता हूं, कुछ चुटीला, कुछ दिल को छू जाने वाली बात लिखने के लिए मुझे कुछ खास शब्‍दों की जरूरत होती है, जो मेरे मन के उद्गारों को ज्‍यों का त्‍यों पाठक के दिल में उतार दे। इसी कोशिश में मैंने जो कुछ लिखा है वह पेश है… जैसे मैं न समझते हुए तेरी पेंटिंग की तारीफ कर सकता हूं, वैसे ही तूं भी इस गद्य का आनन्‍द ले 🙂

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  4. gyani baba ki jai ho..! sanatokotar ka adhyayn maine jaipur se hi kya hai 1994 mai yaha B.F.A. ki padhai bikaner mai nahi thi so jaipr se B.F.A. kiya tha banduwar.to pahle suchana ka sahi sampreshan karo. jitana gadya tumne 15 sal mai padha hai utne ghade mai ne in salono mai char diye hai .chare veti chare veti chare veti..chare chara.haha

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  5. ye bhi jaruri hai..is post ke liye pathak ki rochakta mai ijafa karega ..dekh lena ..joshi ji..pahle pata hota ki tum esa likho ge mere bare mai to khali kale kagaj ka image send kar deta or kahata koyele ki khan mai jakar banaya hai, ya ye khadeta ki bijali chali gayi hai so andhere mai kuch nahi dikhta bati aayegi to tumhara chehara dikhega is kagaj par.. ha.ab mai bata raha hun..ye kya hai.., mangne wala kahta hai joshi se…joshi jug dayta mohe jiyayr jimsi,joshi wapas kahta hai mangan wale se, yame joshi jimsi bache to ya angar,to mangne wala kahata hai wapas se, mahari najar apar peli jime jiko bache nahi.to joshi wapase se kahata hai mangne wale se. Joshi ne jokho nahi marsi o mangan haar..mai to mangan haar hi resa joshi ji ..

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  6. योगेन्‍द्र ने अपना गुण नही छोडा, आगे जा कर यही बहुत बडा बनेगा, इन के विचार भी पढे, बहुत पसंद आये,आप का बहुत सुंदर बना, धन्यवाद

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  7. प्यारे सिद्धार्थ भाई और हेतालु पिस्टर योगी .घणी खम्मा !यार आप कि जोड़ी यूही बनी रहे और नोक जोक चलती रहे , आप दोनों ने स्वयं को सिद्ध किया है य्प्गी ने चित्रकारी में और आप ने पत्रकारिता में , अभी आप दोनों को मैन्ज़िल बहुत लम्बी है मगर लक्ष्य आस पास ही है बस डटे रहिएगा , आप दोनों ही पन्नो पे उकेरते है एक शब्द तो एक चित्र !सादर

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