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उसने ईश्‍वर के लिए गाया था

हां मैंने देखा एक बच्‍चा वह किसी को खुश करने या किसी लालच में नहीं बल्कि अपनी धुन में गा रहा था। रेगिस्‍तान की मिट्टी न केवल जीवटता देती है बल्कि राग का भी वरदान बिना मांगे दे देती है। मैं इस बच्‍चे का नाम नहीं जानता, जाति नहीं जानता… हां यह गडरिया है जो बकरियां लिए घूम रहा था। एक जगह किसी बन्‍द घर के आगे बैठा कागजों के छोटे टुकड़ों से खेल रहा था और गाता जा रहा था। कॉलोनी के लोग मंत्रमुग्‍ध खड़े उसे सुन रहे थे। केवल मैंने धृष्‍टता की ईश्‍वर की उस आवाज को रिकॉर्ड करने की। मैंने सोचा आप भी आनन्‍द ले सकेंगे इस शुद्ध आवाज का। सुनिएगा… यह मेरा पहला वीडियो कास्‍ट है… 
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7 विचार “उसने ईश्‍वर के लिए गाया था&rdquo पर;

  1. वाह! बेशक बोल समझ नही आये मगर भाव और बचपना दोनो का संगम बहुत सुन्दर था।

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  2. आनंद। यह मानवसुलभ सहजता है, ज़िंदगी को महसूसने, संघर्ष करने और भरपूर जीने की उमंग।यह भी मनुष्य ही हैं, जो शब्द गढ़ता है, और इसे मनचाहे शब्दों में बांधता हैं।जैसे हम कुछ शब्द जबरन प्रस्तुत किये, और आप ने इसको अपनी ईश्वर की अवधारणा में ढ़ाल दिया।

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  3. बिलकुल सहज भाव से गाते ऐसे बच्चे देखने है तो गाँव में आइये ,जहाँ अभी भी जिंदगी अपने मूल स्वरुप से चलायमान है.

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  4. शुक्रिया.और आपने भी क्या खूब कहा है इस बच्चे के लिए.आपके शब्दों ने सुनने के इस दुर्लभ अनुभव को लगभग अतीन्द्रीय बना दिया.

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  5. समज तो हमे नही आई, लेकिन बच्चे की आवाज मे बहुत मधुरता जरुर झलकी हे, बहुत सुंदर

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