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सुपरमैन का कंफ्यूजन और सुपर ब्‍लॉगर

मुझे लगता है सुपरमैन शुरू से ही कंफ्यूज है। पहले तो लगता था कि कंफ्यूज है लेकिन अब लगता है कि उस पर जानबूझकर इस प्रकार का द्वंद्व थोपा गया है। सुपरमैन खाली उड़ने वाला सुपरमैन नहीं है। मेरे सुपरमैनों में स्‍पाइडरमैन, बैटमैन, हीमैन, सुपर कमाण्‍डो ध्रुव, नागराज, फैण्‍टम, मैण्‍ड्रेक, लोथार, साबू और भी जो नाम आपको याद आते हों और जिनके पास अपनी खुद की शक्तियां हों, इसमें जोड़ सकते हैं।
अब आप कहेंगे ये लोग तो बिल्‍कुल स्‍पष्‍ट तरीके से अपना काम करते हैं। अच्‍छे लोगों की रक्षा करते हैं और बुरे लोगों को दण्डित करते हैं। लेकिन मुझे यह बात इतनी सीधी नहीं लगती है। इसमें कुछ लोचा है। ये सभी लोग पहले की बनाई गई व्‍यवस्‍था को ही फॉलो कर रहे हैं। न तो उसमें बदलाव ला रहे हैं न व्‍यवस्‍थापकों को बदलाव लाने के लिए मजबूर कर रहे हैं। और तो और पिछले दिनों आए एक्‍समैन ने भी अच्‍छी ताकतों के साथ मिलकर अच्‍छे काम में सहयोग देना शुरू कर दिया।

ऐसा क्‍यों

उन्‍हें क्‍यों पहले से बनी व्‍यवस्‍था को ही फॉलो करना चाहिए जबकि
– उनके पास नैसर्गिक ताकत है
– पूर्व के किसी भी आम इंसान की तुलना में अधिक बुद्धि है
– पहले से अर्जित किसी भी ज्ञान से अधिक ज्ञान है
– किसी भी सत्ता के प्रति जवाबदेही नहीं है
– पृथ्‍वी के भीतर या ब्रह्माण्‍ड में कहीं उन्‍हें रुकना नहीं है
– ताकत और बुद्धि के अलावा कम जरूरतें उन्‍हें स्‍वतंत्र प्रभुसत्ता देती हैं
– वे खुद बेहतरीन न्‍याय कर सकते हैं
– उन्‍हें सलाखों में कैद नहीं किया जा सकता
– राजनीति से वे परे हैं
– सामाजिक बंधन उन्‍हें बांध नहीं सकते
–  वे पलक झपकते ही कहीं भी पहुंच सकते हैं
और भी ऐसी हजारों विशेषताएं जो किसी आम मानव की तुलना में उन्‍हें श्रेष्‍ठ बनाती है। इसके बावजूद वे उसी व्‍यवस्‍था का हिस्‍सा बनते हैं जो व्‍यवस्‍था पहले से बनी हुई है। वे उसमें बदलाव नहीं लाते, बल्कि व्‍यवस्‍था को तोड़ने वाले लोगों को दण्डित करते हैं। पिछले दिनों हैनकॉक आया और उसके बारे में पढ़ा तो लगा कि हां यह है असली सुपरमैन, लेकिन फिल्‍म के अंत तक वह भी आम सुपरमैन बन गया। अच्‍छे कपड़े पहन लिए और समाज की सेवा करने लगा। तो क्‍या सुपरमैन केवल समाज की सेवा के लिए अतिरिक्‍त शक्तियां लेकर आते हैं।

वास्‍तव में सुपरमैन कर क्‍या रहे हैं-
– कानून तोड़ने वालों को दण्‍ड देते हैं
– व्‍यवस्‍था को बनाए रखने में सहयोग देते हैं
– निर्बल लोगों को समस्‍याओं से बाहर निकालते हैं
– अंडर कवर बने रहकर सामान्‍य जिंदगी जीते हैं
– कानून का पालन करते हैं
– राजनीतिज्ञों, पुलिस, प्रशासन, समाज के ठेकेदारों, बॉस, परिवार जैसी इकाइयों का सम्‍मान करते हैं
– सुंदर बने रहते हैं और सुंदर और सभ्‍य लोगों का सम्‍मान करते हैं
– लोगों की केवल उतनी मदद करते हैं कि वे फिर से खड़े होकर पूर्व स्‍थापित व्‍यवस्‍था के लिए काम कर सकें
– बुरे लोगों को पकड़ते हैं और उन्‍हें पुलिस के हवाले कर देते हैं
– पुल को गिरने से बचाते हैं, रेल को ट्रेक पर बनाए रखते हैं, ट्रॉली को नदी में गिरने से रोकते हैं
ये सभी काम तो पहले से स्‍थापित व्‍यवस्‍था के लोग कर ही रहे हैं। सुपरमैनों के इन कामों को देखकर तो लगता है कि लोगों का व्‍यवस्‍था से जुड़े कार्मिकों पर से विश्‍वास उठ गया है। अब आम जनता को ऐसे लोग चाहिए तो तन-मन और धन से उनकी सेवा तो करें, लेकिन अंडर कवर रहकर कुछ भी बदले में नहीं मांगे। ऐसा क्‍यों, भगवान का अवतार अधर्म को खत्‍म कर धर्म को फिर से स्‍थापित करने के लिए ही होता है। इंसान की बनाई व्‍यवस्‍था ढहने लगती है तो वह उसे सुधारने के बजाय भगवान को याद करता है। उन्‍हें कहता है आओ और मुझे फिर से अपने कंफर्ट जोन में लौटा दो। जब से भगवान ने आना बंद किया है इंसान ने सुपरमैन को बुलाना शुरू कर दिया है।

तो सुपरमैन ऐसा क्‍यों नहीं करते कि-
– वे अपनी शक्तियों के इस्‍तेमाल का राज्‍य और सरकार से कर वसूलना शुरू कर दें
– अंडर कवर रहने के बजाय एक नई व्‍यवस्‍था बनाएं जो राज्‍य के सामानान्‍तर चले
– वे खुद अपने स्‍तर पर न्‍याय करें। जो लोग सही है उन्‍हें प्रशय दें और जो गलत हैं उन्‍हें अपने स्‍तर पर ही दण्डित कर दें
– वे ऐसे विचार लेकर आएं जो हर जगह क्रांति कर दे
– वे ऐसे लोग तैयार करें जो उनकी तरह ही अपनी सामान्‍तर सत्ता चलाएं
– वे लोगों को सुपरमैन बनने के लिए प्रशिक्षित करें
वे खूब बच्‍चे पैदा करें और पूरी पृथ्‍वी को सुपरमैन की नई प्रजाति से भर दें, ताकि अक्षम और नाकारा हो चुके इंसान पूरी तरह खत्‍म हो जाएं जैसा कि होमो सैपियंस ने नियंडरथल मानव के साथ किया होगा। यह नई सुपरमैन प्रजाति ही पृथ्‍वी पर राज करे और किसी दूसरे को विकसित ही नहीं होने दे। बिल्‍कुल वैसे जैसे बरगद अपने नीचे किसी दूसरे पौधे को विकसित नहीं होने देता।

पर ऐसा नहीं होगा- क्‍योंकि आखिर सुपरमैन भी तो इंसान ने ही बनाए हैं। और जब इंसान ने अपने लिए सुपरमैन बनाए हैं तो वे इंसान की ही सेवा करेंगे, न कि उन्‍हें मारकर अपनी दुनिया बनाएंगे।

तो कैसा होगा सुपर ब्‍लॉगर
– पहले से स्‍थापित ब्‍लॉगरों को फॉलो करने वाला
– पहेलिया लिखने के दौर में पहेलिया लिखने वाला
– भड़ास निकालने वाला
– पुरानी डायरी से निकालकर कविता लिखने वाला
– दूसरे के ब्‍लॉग पर केवल अच्‍छे अच्‍छे कमेंट लिखकर उन्‍हें प्रोत्‍साहित करने वाला
– आस-पास के लोगों को प्रेरित कर उनके भी ब्‍लॉग शुरू कराने वाला

या मन की बातें बिंदास होकर लिखने वाला…..:) 

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5 विचार “सुपरमैन का कंफ्यूजन और सुपर ब्‍लॉगर&rdquo पर;

  1. वे अपनी शक्तियों के इस्‍तेमाल का राज्‍य और सरकार से कर वसूलना शुरू कर दें- अंडर कवर रहने के बजाय एक नई व्‍यवस्‍था बनाएं जो राज्‍य के सामानान्‍तर चले- वे खुद अपने स्‍तर पर न्‍याय करें। जो लोग सही है उन्‍हें प्रशय दें और जो गलत हैं उन्‍हें अपने स्‍तर पर ही दण्डित कर दें- वे ऐसे विचार लेकर आएं जो हर जगह क्रांति कर दे- वे ऐसे लोग तैयार करें जो उनकी तरह ही अपनी सामान्‍तर सत्ता चलाएं- वे लोगों को सुपरमैन बनने के लिए प्रशिक्षित करें ..नक्सली यही कर रहे हैं शायद ….सुपर ब्लॉगर उपर्युक्त सारे गुण रखते हुए मन की बाते बिंदास होकर लिखने वाला भी हो सकता है …!

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  2. सुपर ब्लॉगर भी होगा तो ब्लॉगर ही न…जैसे सुपर मैन भी मैन ही है भगवान नहीं..खैर जैसा भी हो, विचार तो बेहतरी का ही किया जाये.

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  3. Jab ham dekhte hain,ki,jo ham karna chahte hain,wo superman adi jhat kar jate hain,to lagta hai,koyi to kuchh kar raha hai!

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  4. सुपरमैन से पाठकों को कुछ नया करने की अपेक्षा रहती है, लगता है कि नया कर जायेगा सबके लिये, समाज के लिये। ब्लॉग जगत में उसके प्रतिबिम्ब के यही मायने हो संभवतः।

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  5. आपने अपने ही अंदाज़ में कई बातें लाजवाब कही हैं।शुक्रिया।

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