Uncategorized

प्रेम का शिकारा

मैंने शिकार नहीं शिकारा ही लिखा है। दरअसल पति और पत्‍नी शादी के तुरंत बाद गृह‍स्‍थी के शिकारे पर आ गिरते हैं। कश्‍मीर की वादियों जैसी खूबसूरत लगने वाली दुनिया में घर एक डल झील बन जाता है और पति और पत्‍नी शिकारे में…
LadyinShikara
अब शिकारे में तो एक ही व्‍यक्ति बैठ सकता है तो दूसरे का क्‍या होता है… यही तो सबसे महत्‍वपूर्ण बिंदू है। वास्‍तव में शिकारे में एक ही आदमी होता है। दूसरा तो पानी में उतराता रहता है। कभी पति शिकारे में तो पत्‍नी पानी में और कभी पत्‍नी शिकारे में तो पति पानी में दिखाई देते हैं। कब, कौन, किसे और कैसे पानी में धकेलने में कामयाब होता है यह व्‍यक्तिगत स्किल पर निर्भर करता है। आमतौर पर पुरुषों को ही अधिकतर पानी में देखा गया है, लेकिन कई बार पत्नियां भी पानी में आ गिरती हैं। पर, मूढ़ पुरुषों की तुलना में वे पानी में कम वक्‍त बिताती हैं। यही नहीं जब पत्‍नी शिकारे में होती है तो झील में भ्रमण को दौरान शिकारे को धक्‍का भी पतिदेव से ही लगवाती हैं। आप अगर शादीशुदा हैं तो इस स्थिति से रोजाना ही रूबरू होते होंगे।

दरअसल शिकारे की सवारी के कई नियम हैं। पता नहीं ये शाश्‍वत हैं कि नहीं, लेकिन शादी के बाद से अब तक पिछले पांच सालों में मुझे इनकी इटरनिटी पर कोई संदेह नहीं रहा है। आप भी विश्‍वास कर सकते हैं।
पहला नियम: शिकारे में एक बार में केवल एक ही खिलाड़ी बैठ सकता है, इसमें बैठने का आपके पास ठोस कारण होना चाहिए, वरना आप खुद ब खुद पानी में आ गिरेंगे।
दूसरा नियम: पानी से निकलने के लिए सही समय का इंतजार करें, समय से पहले बाहर निकल आए तो शिकारा भरा हुआ मिलेगा और फिर से पानी में जा गिरेंगे।
तीसरा नियम: एक बार शिकारे पर जमने के बाद पानी में गिरे साथी को शिकारे में पहुंचने के लिए हाथ देने का उपक्रम करें, भले ही आपके हाथ में तेल ही क्‍यों न लगा हो।
चौथा नियम: जितनी बार आप फिसलकर पानी में गिरेंगे आपके शिकारे में लौटने का प्रयास करने की समयावधि भी बढ़ती जाएगी।
पांचवा नियम: एक बार पानी में गिर ही पड़ें तो कुछ देर वहीं बने रहें, बिना वजह खुद को शिकारे में होने का धोखा न दें… आखिर हार मानने का जज्‍बा भी तो होना चाहिए।

नोट: ध्‍यान रखें कि जब आप दोनों ये खेल खेल रहे हों तो किसी और को आपके शिकारे या पानी में होने की स्थिति का पता नहीं चले। इससे केवल जगहंसाई ही हो सकती है। सॉल्‍यूशन नहीं मिलेगा। सो निजी प्रयासों से खेल को चालू रखें और बाहर के लोगों को बाहर रखें। आखिर खेल आपका है और खेल का मजा भी आपका निजी है… 🙂

Advertisements

10 विचार “प्रेम का शिकारा&rdquo पर;

  1. सामान्‍य तौर पर यह लेख शादीशुदा लोगों के लिए लिखा गया है। मेरे कहने का अर्थ यह नहीं है कि इसमें कुछ वल्‍गर है, बल्कि इसका कारण यह है कि जिसने भोगा है वही समझ सकता है। अगर आपके पास ही ऐसे ही शिकारा प्रकरण हो चुके हों तो कृपया बताइएगा… नाम और पहचान छिपा सकते हैं। मेरी पहली पाठक यानि पत्‍नीजी का मानना है कि मैंने क्लिष्‍ट पोस्‍ट लिख दी है, बिना उदाहरण के, और मेरा मानना है कि हर किसी के पास इसका खुद का उदाहरण मौजूद होगा। अब मेरा आग्रह है कि अगर आपको यह पोस्‍ट समझ में न आए तो सपाट तरीके से लिख दीजिएगा कि ऊटपटांग लिखा है समझ में नहीं आया और समझ में आ जाए तो कृपा कर कोई उदाहरण पेश करें… आभारी रहूंगा…

    Like

  2. शिकार और शिकारे में …… नामुमकिन। हम तो भई पहले दिन से ही उनकी फरमाईशों के मोती झील में डुबकियाँ लगा लगा ढूंढ रहे है और नाकामियों के कंकर पत्थरों के सिवा कुछ भी हाथ नहीं आया।

    Like

  3. क्या बात कही है जोशी जी!!इस शिकारे में तो हम सब है..हाँ इतना जरूर है की आपने अनजाने में या जान बूझ कर बहुत गहरी बात लिख डाली है..

    Like

टिप्पणियाँ बंद कर दी गयी है.