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अब तो मामाजी भी (हा हा हा हा हा हा)

एक बार मेरे मामाजी जब कक्षा सात या आठ में थे, तब उनका पर्सनेलिटी टैस्‍ट किया गया था। जयपुर में। जांचकर्ता ने कहा कि यह लड़का इंजीनियर बन सकता है। परिस्थितियों ने कुछ ऐसा मोड़ लिया कि मामाजी को इंजीनियरिंग की पढ़ाई तो दूर कक्षा नौ में भी कॉमर्स लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। बाद में पीडब्‍ल्‍यूडी की नौकरी लगे। वहां कई दिन ठेकेदारों के साथ बड़ी गाडि़यों में घूमने के बाद उकता गए तो बैंक की नौकरी की परीक्षा दी और पहले की प्रयास में सफल हो गए। आज करीब पच्‍चीस साल बाद वे बैंक में मैनेजर के ओहदे तक पहुंच चुके हैं।
इस दौरान उन्‍होंने जिंदगी के कई तरह के अनुभवों के दौरान अपने हास्‍य भाव को बचाए रखा। और हां इंजीनियरिंग नहीं कर पाए लेकिन अपना टूलबॉक्‍स इतना बड़ा कर लिया कि रेफ्रिजरेटर से लेकर कैल्‍कुलेटर तक और पंखे से लेकर लैपटॉप को एक तरह से खोलकर बिखेर देते हैं। उन्‍होंने जितने उपकरण खोले उनमें से कितने ठीक हुए यह ठीक से पता नहीं है, या कहूं कि बताना नहीं चाहता तो उचित रहेगा… वरना फिजिकल पिटाई हो सकती है।

जिंदगी को सरलता से जीने वाले और समस्‍याओं को सरलता से हल करने वाले मेरे इन मामाजी अनिल कुमार हर्ष के बारे में मैं क्‍यों बता रहा हूं…

केवल इसलिए कि कई दिन तक मेरा ब्‍लॉग देखने के बाद उन्‍होंने भी ब्‍लॉग शुरू कर दिया है। यानि हमारी कम्‍युनिटी में आ गए हैं। दुखी दूसरे इंसान को दुखी होते देखकर खुश होता है।
सच कहूं कुछ ऐसी ही फीलिंग हो रही है। यह भी अजीब खुशी है।

खैर, उनके ब्‍लॉग का पता है ….

http://anilkumarharsh.blogspot.com/

अब तक इसमें अंग्रेजी में लिख रहे थे, कल ही उनके लैपटॉप पर हिन्‍दी टूल इंस्‍टॉल किया है। अब तेजी से हिन्‍दी में लिखने का मानस बना रहे हैं। आप भी देखिएगा कैसा है मेरे मामाजी का ब्‍लॉग…

लम्‍बे वाले बड़े मामाजी हैं अनिल कुमार हर्ष और छोटे वाले राजीव हर्ष।

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8 विचार “अब तो मामाजी भी (हा हा हा हा हा हा)&rdquo पर;

  1. अरे वाह!! मामा जी का स्वागत है, अभी जाते हैं उनके ब्लॉग पर.

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  2. अरे ज्ञानजी उन ज्‍योषिती की भविष्‍यवाणी तो सही सिद्ध हुई लगती है। आपके तो चारों ओर लोह ही लोहा है… इंजन में, पटरी पर और निब में भी…

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