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एक अभिव्‍यक्ति

आज पुरानी डायरी में दो पंक्तियां दिख गई… 
सफाई का काम छोड़कर पहले उन्‍हें ही पोस्‍ट करने बैठा हूं… 
मेरी पद्य की दो-चार रचनाओं में से एक…. 

वक्‍त की मौज ने हमको देखा है एक बार 

अब तो हमीं याद करते हैं बिताए पलों को बार-बार









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2 विचार “एक अभिव्‍यक्ति&rdquo पर;

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