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अभिभूत हूं

सात सितम्‍बर को मेरा जन्‍मदिन था। जब पच्‍चीस साल का हुआ था तो लगा था कि बहुत बड़ा हो गया। तब से हर बार वर्षगांठ आने पर लगता कि अरे अभी तक कुछ किया भी नहीं और चौथाई जिंदगी निकल गई। आस-पास का माहौल भी कुछ ऐसा ही था। सो लगता कि जन्‍मदिन आने का मतलब है बहुत खराब बात। एक और साल हाथ से निकल गया। इस भावना ने दिन में काम के घण्‍टों को बढ़ा दिया था। पहले पढ़ाई के साथ-साथ कम्‍प्‍यूटर कोर्स और खेल-कूद जारी रखे तो नौकरी लगने के बाद भी दूसरे आयाम खोजता रहा।

2008 में सक्रिय रूप से ब्‍लॉगिंग में जुड़ा और इसके बाद तो जैसे पंख लग गए। रोज नए लोगों से जानकारी और रोज नए विचार। कभी-कभार इतनी खुश करने वाली घटनाएं भी नहीं होती लेकिन ओवर ऑल बहुत अच्‍छा समय रहा। अभी सात सितम्‍बर को 32 साल का हो रहा था, तब अचानक इस बार दो-तीन दिन पहले घर में जन्‍मदिन की तैयारी शुरू हो गई और बाहर भी लोग पूछने लगे। ऑफिस में जहां आमतौर पर मैकेनिकल माहौल रहता है, वहां भी सरसता घुल गई। स्‍टॉफ के कई लोगों को पता था कि सात सितम्‍बर को मेरा हैप्‍पी बर्थ डे है 🙂

उत्‍साह बढ़ता गया, मैंने पाबलाजी को मेल करके आग्रह किया कि ब्‍लॉगर्स के जन्‍मदिन में मेरा नाम भी शामिल किया जाए। पांच सितम्‍बर को सुबह मेल की और दोपहर तक तो उनकी मेल वापस भी आ गई। शाम तक तो नाम भी जुड़ चुका था और सात सितम्‍बर को बड़े फोंट में उस ब्‍लॉग पर प्रकाशित हुआ कि आज सिद्धार्थ जोशी का जन्‍मदिन है। ऐसा लगा किसी और के बारे में पढ़ रहा हूं। नीचे बधाइयों के संदेश जुड़ते गए।

ब्‍लॉग, ईमेल, एसएमएस, ऑरकुट और फोन कॉल के दौर सुबह-सुबह शुरू हो गए जो देर रात तक चलते रहे। सालों बाद ऐसा लगा कि वाह… ऑफिस में तो छोटी सी पार्टी भी हो गई।

घर में भी पार्टी भी हुई। परिवार के लोग एकत्रित हुए। हमारे यहां काठे दाल-भात और लापसी बनते हैं। यह टिपिकल राजस्‍थानी या कहूं बीकानेरी खाना है। कुल जमा पंद्रह लोग शामिल हुए लेकिन गिफ्ट खूब आए। सबने दिए। कैश भी। मजा आ गया।

साल में कम से कम एक बार तो ऐसा होना ही चाहिए कि बर्थ डे ब्‍वॉय बना जाए। दिन में जमकर खुशियां मनाने के बाद रात को उत्‍साह के मारे नींद भी नहीं आई। (वैसे भी रोज दो बजे से पहले सोता नहीं हूं)। बैठकर बीते सालों के बारे में सोचता रहा। फर्क बस इतना था कि अच्‍छी बातें ही ध्‍यान आई।

पता नहीं साल कैसा बीतेगा लेकिन पहला दिन इतना मस्‍त था कि लगा पूरा साल बढि़या जाएगा। एक बार फिर सभी लोगों को दिल से धन्‍यवाद। मेरे खास दिन को खासमखास बनाने के लिए।

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12 विचार “अभिभूत हूं&rdquo पर;

  1. घर में पार्टी, ऑफिस में पार्टी, कैश, गिफ्ट भी !!और हम यहाँ केक की फोटो का इंतज़ार करते रहे :-)हमें भी नींद नहीं आई :-)))अब अगले साल देख लूँगा ;-)हा हाइसी बहाने एक बार पुन; बधाई व शुभकामनाएँ बी एस पाबला

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  2. अरे केक के फोटो की तो अलग ही रामायण है। अगली पोस्‍ट में सुनाउंगा। मेरी पत्‍नी जी जिन्‍होंने पार्टी का सारा एरेंजमेंट किया वे खासी नाराज हैं कि फोटो नहीं हैं।

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  3. जन्म दिन की ढेरों बधाइयाँ. सच में दावत के फोटो का इंतज़ार रहेगा सिद्धार्थ भाई.यहाँ लापसी तेजी से अपदस्थ हो रही है, बीकानेर में इसके जलवे कायम है, जानकर अच्छा लगा.शुभकामनाएं, अनंत.

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