new thought · sidharth joshi

मैं संक्रामक हो गया हूं !!

अब मैं कह सकता हूं कि मैं संक्रामक ब्‍लॉगर हो गया हूं। पिछले चार-पांच महीने में कई लोगों को ब्‍लॉग शुरू करवा दिए हैं। इनमें से कुछ ब्‍लॉग तो अच्‍छे खासे चल भी रहे हैं। मुझसे बातचीत करने वाले लोग कहते हैं कि थोड़ी देर की बात के बाद ही मैं ब्‍लॉग-ब्‍लॉग बोलने लगता हूं। पहले पोस्‍ट लिखकर पब्लिश करता और लोगों को घर लाकर वह पोस्‍ट पढ़ाता था। अब जहां भी जाता हूं वहां जीमेल अकाउंट बनवाता हूं और ब्‍लॉग शुरू करा देता हूं। मेरे कई  दोस्‍त तो मेरी इस संक्रामक बीमारी के कारण मुझसे कटे-कटे भी रहने लगे हैं। 🙂

इस संक्रमण का सबसे पहला शिकार थे मेरे सीनियर अनुराग हर्ष जी। उन्‍होंने अपने नाम से ही अपना ब्‍लॉग शुरू किया। अब एक पोस्‍ट लिखते है। मुझे दिखाते हैं और ब्‍लॉगवाणी पर अपने पाठकों के आंकड़े देखते हैं। दूसरा नम्‍बर रहा पीटीआई के फोटोग्राफर दिनेश गुप्‍ता का। उन्‍होंने अपना फोटो ब्‍लॉग WORLD WITH MY EYES बनाया। पहले ही महीने में 55 पोस्‍ट ठेल दी। मैंने कहा बंधुवर कभी कभार हैडिंग भी लिख दिया करो। अब वे हैडिंग लिखकर पोस्‍ट में फोटो ठेलते हैं। इससे आगे अभी मैंने बताया नहीं है सो आगे कुछ करते भी नहीं हैं। तीसरा नम्‍बर कह सकते हैं जूलॉजी के लेक्‍चरर डॉ. प्रताप कटारिया का। उन्‍होंने अपने ब्‍लॉग desert wildlifer में लिखना तो शुरू कर दिया लेकिन पहली पोस्‍ट मेरे सामने लिखने के बाद आज तक वापस और कुछ लिखा नहीं है। इसके बाद मैंने ट्राइ किया स्‍तंभकार विनय कौड़ा पर। वे कहते तो हैं ब्‍लॉग शुरू करने के लिए लेकिन करते नहीं हैं। अगली मुलाकात में उन्‍हें ब्‍लॉगर बना ही दूंगा। इसके अलावा फूटी आंख नाम से भी एक ब्‍लॉग शुरू करवा चुका हूं। लेखक ज्ञान संतोषजी अपना नाम नहीं बताना चाहते सो उनका नाम नहीं दे रहा। हां अभी तक उन्‍होंने कोई पोस्‍ट नहीं लिखी है लेकिन शीघ्र ही वे एक कुत्‍्ते का इंटरव्‍यू छापेंगे।

पिछले दिनों जयपुर गया था। वहां मेरे एक दूर के मामाजी हैं डॉ शिव हर्ष। उन्‍होंने बीसेक सालों तक अमरीका में हार्ट सर्जन के तौर प्रेक्टिस की और अब वापस जयपुर आकर रहने लगे हैं। उनके कम्‍प्‍यूटर में कुछ खराबी आई थी। उसे दुरुस्‍त कराने के लिए मुझे बुलाया। कम्‍प्‍यूटर तो हाथों-हाथ ठीक नहीं हुआ लेकिन उनका ब्‍लॉग पहले ही बन गया। आप भी देखिएगा भारत में ह्रदय रोग के कारणों और निवारणों पर उनका ब्‍लॉग हार्ट सिम्‍पलीफाइड। यह ब्‍लॉग अंग्रेजी में ही सही लेकिन है केवल भारतीयों के लिए। डॉ शिव पांच दिन में दो पोस्‍ट ठेल चुके हैं और इसी रफ्तार से आगे बढ़ने वाले हैं। आप वहां पहुंचकर उनकी हौंसला आफजाई कर सकते हैं।

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मैं संक्रामक हो गया हूं !!&rdquo पर एक विचार;

  1. यह तो बहुत खतरनाक बात नही है भाई, आप ऎसा करे कि अपने ब्लांग पर लिख कर लगा दे कि.. कम्‍प्‍यूटर प्रोब्लेम क्षण मै दुर करवाये साथ मै ब्लांग मुफ़्त मै, अगर ब्लांग युही तरक्की करता रहा तो एक दिन इन अखबार वालो को सच लिखना ही पडेगा, फ़िर झुठ छिप पाना कठीन होगा. बहुत अच्छा करते है आप.धन्यवाद

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  2. ये संक्रमण गुणकारी बलवर्धक और स्फूर्तिदायक है.इसके विपरीत प्रभाव गौण हैं.

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  3. ऐसा संक्रमण हिंदी और भारत के लिए अच्छा ही है. आप पीड़ित ही रहें यही हमारी कामना है.

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  4. आप जैसे लोगो की समाज को बहुत ज़रूर्त है त्तकि लोग इधर उधर ना जये अच्छे ब्लोग लिखे

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  5. संक्रमण फैलाने का दौर जारी है। शीघ्र ही डिफेंस रिसर्च डवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन की दिल्‍ली की लैब सॉलिड स्‍टेट फिजिक्‍स लैबोरेट्री के पूर्व निदेशक डॉ. एच.पी. व्‍यास जी का ब्‍लॉग भी शुरू कराने वाला हूं। कल शाम को ही उनकी कॉल आई थी। वे हिन्‍दी और अंग्रेजी दोनों में अच्‍छा लिख लेते हैं। विवेकानन्‍द और गांधी दोनों पर उनकी शानदार पकड़ है। एक दो दिन बस इंतजार कीजिए।

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  6. अच्छी आदतें वो भी अच्छे लोगों को लगवाना किसी तरह का संक्रमण नहीं है बन्धु.. ऐसे ही तो प्रचार प्रसार होगा हिंदी ब्लोग्स का.. शुभ काम है, आँख मूँद के करते रहिये..

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  7. जबलपुर गया था, फुल टाईम बस यही फैला रहा था. कई आये चपेट में 🙂

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  8. जैसा मैंने कहा था व्‍यासजी का ब्‍लॉग बन चुका है। अभी तक उन्‍होंने कोई पोस्‍ट नहीं लिखी है लेकिन शीघ्र ही वे लिखना शुरू करेंगे। http://hpvyas.blogspot.com/यह उनका लिंक है।

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