new thought · sidharth joshi

कुछ ऐसा है मेरा बीकाणा

चुनाव में ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा किया। इस दौरान कैमरा भी हाथ में था सो कुछ तस्‍वीरें ऐसी भी ली जो भले ही चुनाव के काम की न हो लेकिन बीकानेर को प्रदर्शित करने वाली हो सकती हैं। 

मैंने अपनी नजर से बीकानेर को पेश करने का प्रयास किया है। गौर फरमाइए। 
  

छोटा फॉर्म हाउस। वैसे रेगिस्‍तान में अरंडी का पेड़ भी वृक्ष की शोभा पाता है। यहां तो सचमुच का पेड़ है। हां भरा नहीं है लेकिन पूरा है। पुराने तरीके की झोंपड़ी। आजकल तो बीकानेर में टूरिज्‍म के लिहाज से भी झोंपडि़यां बनने लगी हैं। उनमें एसी और कूलर भी लगे होते हैं।

धोरों पर बनने वाली ये लकीरें आम दिनों में अधिक स्‍पष्‍ट होती है। मैं जिस क्षेत्र में था वहां वनस्‍पति बढ़ने लगी है सो धोरे कम हो रहे हैं और धूल की लकीरें भी। 

भीषण गर्मी में कीकर की छांव में भेड़ें आराम फरमा रही हैं। 

आ लेके चलूं तुझे ऐसे गगन के तले, जहां गम भी न हो आसूं भी न हो
 

रेगिस्‍तान के जहाज के लिए चालीस डिग्री तापमान कुछ भी नहीं है। वह आराम से बैठा है। 🙂 
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10 विचार “कुछ ऐसा है मेरा बीकाणा&rdquo पर;

  1. द्विवेदी जी आप तो बीकानेर से परिचित हैं। आप हमेशा आमंत्रित हैं। बस सूचना कर दीजिएगा कि कब आ रहे हैं। ताकि कुछ आवश्‍यक व्‍यवस्‍थाएं कर सकूं। यकीन मानिए आपका इंतजार शुरू होता है अब….

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  2. अच्छा लगा चित्रों के माध्यम से बीकानेर देखना-इतनी गरमी में तो हालत खराब हो गई होगी भाई!!

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  3. सिद्धार्थ जीबीकानेर की खूबसूरती अधूरी सी लगी। क्‍योंकि बीकानेर बहुत ही खूबसूरत है। अपने केमरे को थोड़ा और घुमाएं।

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  4. @ समीर भाई, यह रोजाना के हालात हैं। वैसे इस बार तो शायद बहुत से स्‍थानों पर तापमान 45 के आस-पास है। बीकानेर, बाड़मेर और जैसलमेर की गर्मी अन्‍य स्‍थानों से ऐसे अलग होती है कि आर्द्रता भी गिर जाती है। आमतौर पर दिन में छह से आठ प्रतिशत आर्द्रता ही होती है। सूखी गर्मी होंठ और जान सुखा देती हैं। हम लोग ऊंट की तरह पानी पीते हैं तो राहत मिलती है। 🙂 @ डॉ: गुप्‍ता, मैं बीकानेर के कई चित्र पहले भी दे चुका हूं। इस बार मई की गर्मी और ग्रामीण क्षेत्रों के चित्र हैं। वैसे आपका आदेश सिर माथे। जल्‍दी ही कुछ और खूबसूरत चित्र पेश करने का प्रयास करूंगा। आपने अवलोकन किया इसके लिए आभार।

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  5. मुझे आपका ब्लॉग बहुत अच्छा लगा! आपने बहुत ही सुंदर लिखा है और साथ में ख़ूबसूरत तस्वीरें भी! मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है!

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  6. इसे कहते है असली दर्शन….वाकई रोज वहां तो एक जिजीविषा से गुजरना पड़ता है जी…..

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