new thought · sidharth joshi

एक और गधे की कहानी

मेरे एक वरिष्‍ठ साथी ने मुझे एक गधे की कहानी सुनाई। कहानी मैंने कई दिन पहले सुनी लेकिन अब भी मेरे दिमाग में यह कहानी घूम रही है। सो अब इसे अपने ब्‍लॉग पर डाल रहा हूं। 

एक गांव में एक धोबी के पास एक गधा था। उस धोबी के घर के पास एक सूखा हुआ गहरा कुआं था। रोजाना गधा कुएं के पास से गुजरता। एक दिन गधा कुएं में गिर गया। उस समय धोबी घाट पर था। गधे की किसी ने सुध नहीं ली। वह शाम तक कुएं में गिरा कहराता रहा। शाम को मालिक घर आया तो उसने देखा कि गधा कुएं में गिर चुका है। अड़ोस पड़ोस के लोग एकत्रित हो गए। सबने मिलकर निर्णय किया इस घरों के बीच खुदा हुआ यह सूख कुआं खतरनाक हो सकता है सो इसे भर दिया जाए। गांव वालों ने मिट्टी लाकर कुएं में डालनी शुरू की। यह गधा कृष्‍ण चंदर के गधे की तरह इंसानों की बातों को समझने वाला था।बस इसमें अधिक अक्‍ल यह थी कि कभी इंसानों की बोली नहीं बोलता था। उसने सुना कि उसे जिंदा दफन करने की तैयारी हो रही है। पहले पहल तो वह गधा खूब रेंका और अपनी ही भाषा में चिल्‍लाता रहा कि हरामखोर धोबी मैंने जिन्‍दगीभर तेरी गुलामी की तूं उसकी यह सिला दे रहा है। 
लेकिन गधे की बात किसी ने नहीं सुनी। कुएं को भरना शुरु कर दिया गया। जैसे जैसे कुएं में मिट्टी गिरती गई गधा चतुराई से मिट्टी के ढेर पर चढ़ता रहा। घण्‍टों की मशक्‍कत के बाद गांव वालों ने कुएं को मिट्टी से भर दिया। ढेर पर चढ़ता हुआ गधा भी ऊपर तक आ गया। अपने गधे को सुरक्षित देख मालिक चिल्‍लाया कि मेरा गधा वापस आ गया। लेकिन अब तक गधे का मन भी फिर चुका था। उसने अपने ही मालिक को दुल्‍लती मारी और बोला कौनसा मालिक कैसा मालिक। मुझे तो तुम कुएं में ही दफन कर रहे थे। 
ऐसा कहकर गधा चला गया और मालिक देखता रह गया। कुछ गधे अब भी बड़े संस्‍थानों में काम कर रहे हैं। जब वे कुएं में गिरेंगे तो उन्‍हें निकालने के बजाय उन पर मिट्टी ही डाली जाएगी। 🙂 
Advertisements

2 विचार “एक और गधे की कहानी&rdquo पर;

  1. गदहे की ये नयी कहानी देता यह संदेश।जैसे जान बची गदहे की सभी बचाओ देश।। सादर श्यामल सुमन 09955373288 मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं। कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।। http://www.manoramsuman.blogspot.comshyamalsuman@gmail.com

    Like

  2. अब शायद यह मेरे भी दिमाग में घूमती रहेंगी। बात सोचने योग्य है।

    Like

  3. gaov k log mehanti hote hai unhone dusroka bhala sochha aur kuaa mittise bhra jise dusra koi kua me n gire, bade shero (citi) me log kuaa ya khada bhrne ke liye sarkar ke bharose baythe rhate hay janta bechhari roj mahgai ke kuaa aur khadee me girti rhati hay

    Like

टिप्पणियाँ बंद कर दी गयी है.