निशांत मिश्र · प्रेरक कथाएं · शांति · new thought · sidharth joshi

गुजरना तूफान से तूफान का…

इन दिनों दूसरों के लिखे ब्‍लॉग लगातार पढ़ रहा हूं। एक साल बाद कुछ लोग ऐसे मिले हैं जिन्‍हें पढ़कर लगता है ठीक है कुछ देर रुकते हैं कहीं और से भी रोशनी आ रही है। इन दिनों एक ब्‍लॉग का तो बस फैन ही हो गया हूं। इस ब्‍लॉग के लेखक को तो मैं नहीं जानता लेकिन इस ब्‍लॉग की हर पोस्‍ट को अच्‍छी तरह पढ़ चुका हूं। ब्‍लॉग का नाम है



इसमें निशान्‍त मिश्र जी ऐसी सुंदर कथाएं संग्रह की हैं कि दिल चाहता है उनके हाथ चूम लूं। हर एक कथा एक तूफान की तरह दिमाग में घुसती है और पहले से चल रहे तूफान से टकरा जाती है। विचारों का प्रवाह पहले से ही रोलर कोस्‍टर पर बिठाए रखता है। इसके साथ निशांतजी के झोंके जैसे उद्वेलित कर देते हैं। हर पोस्‍ट पढ़ने के बाद कुछ देर के लिए कम्‍प्‍यूटर बंद कर देता हूं। सोचने का मसाला जो मिल जाता है। काफी देर सोचने के बाद दिमाग इतना शांत हो जाता है कि कुछ और लिखने का जी ही नहीं चाहता। मैं इस ब्‍लॉग को ट्रैक्‍यूलाइजर ब्‍लॉग कहूंगा। जहां अधिकांश ब्‍लॉग भड़ास निकालने या पानी में हलचल बढ़ाने का काम कर रहे हैं वहीं ये प्रेरक कथाएं दिल और दिमाग को कुछ देर की शांति दे जाती हैं। मेरे ब्‍लॉग पर आने वाले सभी पाठकों को निवेदन करूंगा कि एक बार निशांतजी के ब्‍लॉग पर अवश्‍य जाएं। वहां हर किसी के लिए कुछ खास जरूर मिलेगा। 
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2 विचार “गुजरना तूफान से तूफान का…&rdquo पर;

  1. सिध्धार्थ भाई , निशाँत मिश्र जी की प्रेरक कथाओँ को पढवाये< – जो भी आपको सब से ज्यादह पसँद आयी हो वही प्रस्तुत कर देँ अग्रिम आभार सहित,स स्नेह,- लावण्या

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  2. … अब क्‍या बताउं। पसंद की बात हो तो हर पोस्‍ट खास है। निशांतजी ने अपने ब्‍लॉग में डिस्‍क्‍लेमर भी लगा रखा है कि प्रेम का दरिया है जिसको जितना चाहिए बाल्‍टी भर ले जाए। मुझे लगा कि बाल्‍टी भरकर अपने ब्‍लॉग पर रखने से अच्‍छा है कि दोस्‍तों को दरिया का रास्‍ता ही क्‍यों न बता दिया जाए। अधिक दूर भी नहीं है। 🙂

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