new thought · sidharth joshi

बंदर के हाथ उस्‍तरा

यह कहावत मैंने मेरे अंचल की कहावतें ब्‍लॉग से नहीं ली है बल्कि पिछले कुछ दिन से मैं खुद ही इसे चरितार्थ करने में लगा हूं। आप जो यह तस्‍वीर देख रहे हैं वह मुझे मेरे संस्‍थान की ओर से दिए गए कैमरे का ‘सदुपयोग’ है। शुरूआती दौर में ही मैंने बीकानेर आ रहे पर्यटकों की तस्‍वीर खींचना शुरू कर दिया। यहां आकर हवेलियों, जूनागढ और अन्‍य जगहों के साथ ये लोग यहां के बाशिंदों के फोटोग्राफ भी उतारते हैं। बेधड़क बाजार में खड़े होकर लोगों के मुंह के सामने कैमरा लगाए रखते हैं। लोग भी लाल मुंह के इन बंदरों से कुछ कहते नहीं। मैंने अपने अंदाज में बदला लिया और इस खूबसूरत कन्‍या के काफी करीब जाकर कैमरे का मुंह खोल दिया। ये और इसके साथी पहले तो काफी हैरान हुए। कुत्ता आदमी को काटे तो कोई समस्‍या नहीं लेकिन जब एक आदमी ने ही कुत्ते को काटना शुरू कर दिया तो अजीब स्थिति पैदा हो गई। पत्रकारिता में तो इसे ही खबर कहते हैं। जो भी हो यह युवति पहले तो मुंह बचाती रही लेकिन बाद में मुस्‍कुराने लगी। मुझे अदा पसंद आई। अब उस्‍तरा है तो इसे चलाउंगा ही। यह पहला फोटो आगामी दिनों में और भी होगा बीकानेर दर्शन।

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