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सुंदरता का पैमाना


पिकासो ने एक सिद्धांत दिया था जिसमें उसने बताया कि हर चीज की सुंदरता उसके घटकों के सही अनुपात में होने से होती है। अगर यह अनुपात गड़बड़ जाए तो सुंदरता कम हो जाती है। 

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3 विचार “सुंदरता का पैमाना&rdquo पर;

  1. पिकासों का सिध्‍दान्‍त अपनी जगह। हमने तो सुना था (और उसे ही मान भी रहे हैं) कि सुन्‍दरता तो देखने वाले की आंख की पु‍तली में समाई होती है। यदि सुन्‍दरता का कोई ‘पैमाना’ होता तो दुनिया के सारे लोग एक ही स्‍त्री से प्‍यार करते, उसे ही चाहते। यदि सुन्‍दरता का पैमाना होता तो मजनू, लैला पर क्‍यों मर मिटता भला ।‍

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  2. सही है…. पिकासो के सिद्धांत की अपेक्षा विष्‍णु वैरागी जी की बातों से मैं अधिक सहमत हूं…महा शिव रात्रि की बहुत बधाई एवं शुभकामनाऐं..

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  3. विष्‍णुजी सारी दुनिया न सही लेकिन दुनिया का एक बहुत बड़ा हिस्‍सा कुछ दिन के लिए जब तक कि मांस और पिण्‍ड का आवरण सही अनुपात में ऐश्‍वर्य राय के चेहरे और शरीर पर जमा है उसे पसंद करने वालों की कमी नहीं रहेगी। और जब संतुलन बिगड़ेगा तो आप जानते ही हैं कि रेखा को अब कितने लोग पसंद करते होंगे। 🙂 आपके जमाने की है इसलिए यह उदाहरण लिया। रही बात प्रेम की, तो वह तो रसायन का कमाल है। कैसे फिर कभी बताने का प्रयास करूंगा।

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