new thought · sidharth joshi

प्‍यार में कभी कभी

दोस्तों क्या तुमने कभी प्यार किया है। तो मेरे साथ गाओ…
ऋषि कपूर के इस उद्वेलित करने वाले आव्हान के साथ हॉल में मौजूद हर युवा कदम थिरकने लगता है। सालों बीत गए आज भी जबजब यह गाना बजता है तो युवा दिल साथ गाने के लिए मचल उठते हैं। कुछ समय पहले डिस्कवरी पर कैमिस्ट्रि ऑफ लव कार्यक्रम देखा तो प्रेम का रासायनिक पक्ष दिखाई दिया। वैज्ञानिकों के अनुसार तो यह ऑक्सिटोसिन और डोपामिन से अधिक कुछ नहीं है। यही मां पुत्र में होता है और यही प्रेमीप्रेमिका में। बस अंदाज बदलता है।
प्रेम को समझने वालों की तुलना में इसे नहीं समझने वालों की संख्या अधिक है। कुछ इसे आकर्षण बताकर खारिज कर देते हैं तो कुछ इसे संतति जनन की आवश्यक शर्त बताकर उत्तेरजीविता से जोड़ते हैं। फ्रायड सैक्स से आगे निकल नहीं पाए तो कार्ल युंग के पास अवचेतन का अवलम्बन रहा। आधुनिक कीमियागरों ने तो इसे पूर्णतया रासायनिक सिद्ध कर दिया। जो लोग प्रेम में पड़े वे उलझकर रह गए और जिन लोगों ने इसे बाहर से बैठकर देखा और तार्किक विश्लेषण किया वे विषय से ही अछूते रह गए। कुल मिलाकर कह सकते हैं

‘ये तो प्रेम की बात है उधो, बन्दगी तेरे बस की नहीं है।’

जीनियस लियो नार्दो दा विंसी ने सुंदरता का पैमाना 1:768 जैसा कुछ बताया था। यानि किसी की शक्ल या शरीर में यह अनुपात परफेक्शन के करीब हो तो वह व्यक्ति सुंदर दिखाई देता है। फिल्म सितारे इस प्रकार की खूबसूरती या तो रखते हैं याफिर इसके लिए कॉस्मेकटिक सर्जन की सहायता लेते हैं। सुंदरता के दृष्टिकोण में खरे उतरने वाले इन सितारों को बहुत से लोग प्यार करते हैं। यानि बहुत ज्यादा लोग। बड़ी जनसंख्यां द्वारा प्यार किए जाने की अवस्था एक संकेत यह छोड़ती है कि कुछ तो ऐसा है जो फ्रायड या मेण्डाल के सिद्धांतों की पुष्टि करता है।
यहां एक और समस्या है। किसी औरत की जांघें या स्तंन तो यह सीधा संदेश देते हैं कि वह जनन अथवा पोषण में बेहतर हो सकती हैं। फिर कजरारी आंखें या तीखी नाक सितारों को लोगों का प्यारा कैसे बना सकते हैं। यानि कुछ ऐसा है जो प्रत्यक्ष शारीरिक लक्षणों के अलावा हमें सटीक चुनाव में मदद करता है। यह घने बाल, सुंदर आंखें, गोरा रंग और कई चीजें हो सकती है। कई बार आर्यों पर, तो कई बार अंग्रेजों पर यह आरोप लगता है कि उन्होंयने सुंदरता के मायने तय किए और आम भारतीय को यह सोचने पर मजबूर किया कि गोरा रंग और पुष्टय शरीर सुंदरता के पैमाने हैं लेकिन अंग्रेजों और आर्यों की बातों को छोड़ भी दिया जाए तो भी ये लक्षण तो रहते हैं ही और मेरा मानना है कि संकेत और उनका परिणाम भी उतना ही प्रबल रहता है। तो इस बार प्रेमियों का जोड़ा दिखाई दे जिसमें एक बहुत काला और दूसरा बला का खूबसूरत हो या इसका उल्टा तो आश्चर्य करने के बजाय यह देखने की कोशिश करिएगा कि इन प्रेमियों को करीब लाने में कौनसा फैक्टर काम कर रहा है। (पैसे वाले फैक्टर को फिलहाल काउंट मत कीजिएगा।) 🙂

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