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तंत्र और तांत्रिक क्रियाएं

तंत्र को ज्‍योतिष से अधिक गूढ विषय माना जाता है। आज मैं आपके समक्ष तंत्र का दूसरा ही पक्ष पेश करने की कोशिश करूंगा। इस पक्ष को जानने के बाद शायद आपके दिमाग से तांत्रिक के नाम पर उभरने वाली छवि में कुछ बदलाव आए जिसमें एक काले, लाल या गेरूए कपडे पहने एक आदमी होता है। लम्‍बे बाल, दाढी और रहस्‍यमयी आवाज के साथ दूसरी दुनिया से सम्‍पर्क बनाने की कोशिश करते तांत्रिक की बजाय मैं शुरुआत करता हूं तंत्र से
तंत्र क्‍या है?
किसी विशेष परस्थिति को बनाने के लिए एक व्‍यवस्‍था की आवश्‍यकता होती है। यह व्‍यवस्‍था कोई व्‍यक्ति भी कर सकता है और इसके लिए पूरा सिस्‍टम भी बनाया जा सकता है। इसी सिस्‍टम को गूढ भाषा के साथ तंत्र कहा जाता है। बस इतना ही।
नहीं जनाब यह तो शुरूआत है सिस्‍टम या तंत्र को समझने की। यहां से हम जान सकते हैं कि तंत्र क्‍या है इसमें प्रवेश कैसे किया जा सकता है। मैं आपको कोई काम बताउं और आप उस काम को सोचने की बजाय करके देखें तो यह भी सिस्‍टम ही है। कैसे… याद करें मैंने आपको एक प्रयोग बताया कि जिसमें घर के एकांत स्‍थान पर ध्‍यान करना था कि आप छत के किसी कोने से खुद को देख रहे हैं।
इसमें जब आप खुद यह कार्य करके देखते हैं तो आपको कुछ रियलाइज होता है यानि एक विशिष्‍ट अनुभूति जो सिर्फ अपने संबंध में आपको ही हो सकती है। अगर आपने यह प्रयोग किया है तो जान सकते हैं कि आप एक अलग अंदाज में अलग वातावरण में पहुंच जाते हैं। यानि आपने तांत्रिक क्रिया के साथ अपने सैकण्‍ड माइंड में दस्‍तक दी और उसे सुना भी। कुछ इसी तरह से वह ढोंगी तांत्रिक भी करता है। अंतर इतना है कि वह अपने सैकण्‍ड माइंड में उतरकर वर्तमान परिस्थितियों की गणना अवचेतन से करता है और आपके प्रश्‍नों का माकूल जवाब देने में सफल होता है। आप कोशिश करें तो आप भी अपने सैकण्‍ड माइंड (अंतरमन) में उतरकर वही जवाब हासिल कर सकते हैं।

यहां एक सवाल- यह कैसे होता है
हर व्‍यक्ति के पास अपने सवालों के जवाब होते हैं।

इस पर एक और सवाल- फिर उलझनें क्‍यों होती है
क्‍योंकि जो जवाब है हम उसका सामना करने की हिम्‍मत नहीं कर पाते

अगला सवाल- जवाब पाने का क्‍या तरीका है
जवाब – तांत्रिक हो जाइए

ऐसा करने से आपके पास जवाब को स्‍वगत हासिल नहीं करने की सुविधा उपलब्‍ध रहती है। जब आप अपने अंतरमन में तंत्र की सहायता से उतर चुके होते हैं तो वहां सवालों के जवाब भी सामने होते हैं और संभावित परिणाम भी।
क्‍या किया जाए तांत्रिक होने के लिए
सबसे आसान तरीका तो यह है कि अपने अंतरमन की हमेशा सुनो। एक बार सुनने में तो कोई समस्‍या नहीं है लेकिन हमेशा शब्‍द के साथ यह क्रिया लगभग असंभव हो जाती है। दूसरा तरीका धार्मिक हो जाने का है। हम अपने ईष्‍ट के समक्ष बहुत कम झूठे होते हैं।
क्‍योंकि जैसा देव वैसा पूजारी और जैसा पूजारी वैसा देव
यहां किसी प्रकार का अहंकार या छिपाव नहीं होता और आप आसानी से अपने सवालों के जवाब पा जाते हैं
और अंत में तरीका बचता है ध्‍यान का
इसके बारे में कल बात करेंगे…

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